सेम एक प्रकार की लता होती है, जिसकी फलियों को खाने के लिए प्रयोग किया जाता है. सेम की फली में बहुत सारी पौष्टिकताएं होने के कारण आयुर्वेद में सेम को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सेम की प्रत्येक फली में 4-5 बीज होते हैं, जो अंडाकार होते हैं. सेम का सेवन कई तरह से किया जा सकता है, वैसे ज्यादातर लोग सेम की सब्जी बनाकर खाते हैं.
सेम की फली में कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम आदि अनगिनत पौष्टिकताएं होती हैं. सेम मधुर, थोड़ा कड़वा, गर्म तासीर होने के कारण भारी भी होता है. इसके अलावा सेम पेट फूलना, एसिडिटी तथा विष का असर कम करने वाला होता है. सेम के फायदों के आधार पर आयुर्वेद में कैसे औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है और क्या-क्या फायदा होता है. आइए जानते हैं, इसके बारे में.
पाचन के लिए फायदेमंद होते हैं सेम के पत्ते
क्या आपने कभी सेम के पत्तों को सिर्फ एक साधारण सब्जी समझकर नजरअंदाज कर दिया है? आयुर्वेद के अनुसार सेम के पत्ते कोई मामूली पत्ता नहीं, बल्कि दर्जनों बीमारियों का काल माने जाते हैं. सेहत के लिए ये इतने फायदेमंद हैं कि इनके सेवन से पाचन मजबूत होता है और ब्लड शुगर तक नियंत्रित रहती है. यही वजह है कि सेम के पत्ते आयुर्वेद में एक चमत्कारी औषधि के रूप में जाने जाते हैं.
पेद दर्द में भी राहत देता है सेम का पत्ता
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डॉक्टर दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि सेम के पत्ते पाचन सुधारने में बेहद मददगार हैं. इनमें मौजूद फाइबर कब्ज, सूजन और अपच को दूर करता है. मल त्याग को नियमित करता है और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को संतुलित रखता है. इसके चलते पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. सेम के पत्ते सब्जी के रूप में खाए जा सकते हैं या इनके रस का लेप बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाया भी जा सकता है.
सेम के पत्ते में होते हैं औषधीय गुण
सेम के पत्ते पारंपरिक रूप से बुखार और दर्द से राहत के लिए उपयोग किए जाते हैं. खासकर बच्चों का बुखार कम करने और शरीर के दर्द व सूजन को कम करने के लिए इनकी पत्तियों का रस तलवों पर लगाने या लेप करने की सलाह दी जाती है. साथ ही इनके सेवन से गले के दर्द और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में भी आराम मिलता है, क्योंकि इनमें कई औषधीय गुण और पोषक तत्व मौजूद होते हैं.
मौसम के बदलाव के साथ गले में दर्द, सर्दी-खांसी जैसी बहुत सारी समस्याएं होने लगती हैं. गले के दर्द से आराम पाने में सेम की फली का ऐसे सेवन करने पर आराम मिलता है. 5-10 सेम के पत्ते के रस का सेवन करने से गले का दर्द कम होता है.
उल्टी-दस्त में भी है रामबाण इलाज
अगर खान-पान में बदलाव के कारण दस्त हो रहे हैं, तो सेम के बीजों का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से उल्टी, दस्त, मूत्र संबंधी समस्या एवं पेट के दर्द से लाभ मिलता है.
पेट दर्द से दिलाए आराम
अगर मसालेदार खाना खाने से पेट में गैस हो जाती है, जिसके कारण पेट में दर्द होने लगता है. सेम के पत्तों को पीसकर पेट पर लगाने से पेट का दर्द कम हो जाता है.
अल्सर में फायदेमंद
सेम की फली अल्सर का घाव सूखाने में बहुत काम आती है. राजशिम्बी के बीजों को भैंस के दूध में पीसकर शाम के समय अल्सर पर लगाना चाहिए इस तरह लगाने से अल्सर का घाव शीघ्र भर जाता है क्योंकि शाम के समय गर्मी कम होती है.
खुजली की परेशानी करे दूर
कभी-कभी एलर्जी के कारण खुजली की समस्या होती है. सेम के पत्ते के रस को खुजली वाली जगह पर लगाने से परेशानी कम होती है. सेम बुखार में लाभदायक होती है.
सेम की फली के उपयोगी भाग
आयुर्वेद में सेम की फली, बीज तथा पत्ते का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है. इसके अलावा आप सेम की सब्जी बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं. अगर आप किसी खास बीमारी के इलाज के लिए सेम का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें. चिकित्सक के परामर्श के अनुसार –
15-30 मिली काढ़ा और 5-10 मिली रस का प्रयोग कर सकते हैं.
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