Hypertension In Teenages: बीमारी चाहे जैसी भी हो, इंसान टूटता जरूर है. फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक. हैरानी की बात यह है कि, आजकल कुछ ऐसी बीमारियां जन्म ले रही हैं, जो कभी बुढ़ापे में हुआ करती थीं. लेकिन, आज इन बीमारियों ने बच्चों तक को नहीं छोड़ा है. ऐसी ही बीमारियों में एक हाइपरटेंशन भी है. हाई ब्लड प्रेशर की गिरफ्त में आज बड़ी संख्या में बच्चे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि 7 से 8 साल पहले तक 20-30 साल के युवाओं में हाइपरटेंशन न के बराबर था. लेकिन, आज ये 6 से 19 साल तक के किशोरों में भी देखा जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चों में नजर आने वाले कुछ बदलाव और हेल्थ इश्यूज पर ध्यान दें.
बता दें कि, हाइपरटेंशन आमतौर पर एक साइलेंट के तौर पर मनुष्य में प्रवेश करता है. ज्यादातर लोगों को शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं. यदि समय रहते हम इस पर काबू नहीं पाए, तो आगे चलकर यह हाई प्रेशर हार्ट, अटैक, स्ट्रोक, किडनी की समस्या या डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. अब सवाल है कि, हाइपरटेंशन क्या है? हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं? आइए जानते हैं इन सवालों के बारे में-
क्या होता है हाइपरटेंशन
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, हृदय का मुख्य कार्य शरीर के चारों ओर ब्लड पंप करना है. धमनियों के जरिए ब्लड फ्लो करने के लिए दबाव की एक निश्चित मात्रा की आवश्यकता होती है. ब्लड फ्लो करने के लिए दबाव की एक निश्चित मात्रा की आवश्यकता होती है. वहीं, यदि ब्लड फ्लो का यह दबाव सामान्य दबाव से अधिक होता है, तो यह रक्त वाहिकाओं की दीवार पर अतिरिक्त तनाव डालता है. इसको ही हाई ब्लड प्रेशर या हाईपरटेंशन कहते हैं.
बच्चों के लिए सामान्य रक्तचाप क्या है?
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 वर्ष या 12 वर्ष आयु तक के बच्चों के लिए, सामान्य रक्तचाप तब होता है जब सिस्टोलिक संख्या (ऊपरी संख्या) 110 से कम और डायस्टोलिक संख्या (निचली संख्या) 80 से कम हो. यानी (110/80 मिमी एचजी). वहीं, 13 वर्ष या उससे अधिक आयु के किशोरों के लिए, सामान्य रक्तचाप तब होता है जब सिस्टोलिक संख्या (ऊपरी संख्या) 120 से कम और डायस्टोलिक संख्या (निचली संख्या) 90 से कम हो (120/90 मिमी एचजी) हो.
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के कारण?
बच्चों में आमतौर पर हाइपरटेंशन के दो कारण होते हैं. पहला, प्राइमरी हाइपरटेंशन और दूसरा सेकेंडरी हाइपरटेंशन. टीनएजर और यंग में प्राइमरी हाइपरटेंशन सबसे अधिक कॉमन है. वैसे तो यह अनहेल्दी लाइफस्टाइल का नतीजा है. लेकिन, कई बार फैमिली हिस्ट्री के कारण भी यह प्रभावित कर सकता है. इसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है. हालांकि, सेकेंडरी हाइपरटेंशन बच्चों में कम पाया जाता है. यह सामान्यतौर पर किडनी प्रॉब्लम, हाइपरथायरायडिज्म, हार्मोनल इंबैलेंस, हार्ट प्रॉब्लम, बहुत ज्यादा टेंशन और दवाओं के कारण होता है.
बच्चों में हाइपरटेंशन के लक्षण?
- लगातार उल्टी या मतली
- सीने में जकड़न
- सांस लेने में परेशानी
- सिरदर्द
- धड़कनें तेज चलना
- दिखने में परेशानी
हाइपरटेंशन का क्या है इलाज?
हाई ब्लड प्रेशर को हेल्दी डाइट से भी कंट्रोल किया जा सकता है. इसलिए अपनी डाइट में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें. साथ ही, नियमित एक्सरसाइज जरूरी है. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट वॉकिंग, एरोबिक, स्विमिंग और साइकिलिंग आदि करें. क्योंकि, मोटापे के कारण भी हाइपरटेंशन होता है. अगर परेशानी बढ़े तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है.