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अक्सर लोग खर्राटों को गहरी नींद की निशानी मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. तेज खर्राटों के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. मोटापा, साइनस और गलत जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं. यदि आपको सुबह सिरदर्द या दिनभर थकान महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें. समय पर जांच और सही उपचार से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है.
अक्सर लोग खर्राटों को हल्के में लेते हैं और इसे थकान या गहरी नींद का हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, यदि खर्राटे रोज आते हैं, बहुत तेज होते हैं या नींद के दौरान सांस रुकने जैसी स्थिति बनती है, तो यह सामान्य नहीं है. ऐसे खर्राटे शरीर में ऑक्सीजन की कमी का कारण बन सकते हैं. सुबह उठते ही सिरदर्द, गले में सूखापन या अत्यधिक थकान महसूस होना भी खतरे के संकेत हो सकते हैं. समय रहते जांच जरूरी है, क्योंकि कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत खर्राटों से ही होती है.

लगातार खर्राटों की सबसे बड़ी वजह स्लीप एपनिया मानी जाती है. इसमें सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इससे नींद बार-बार टूटती है, भले ही व्यक्ति को इसका एहसास न हो. दिन में नींद आना, चिड़चिड़ापन और याददाश्त का कमजोर होना इसके आम लक्षण हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दिल, दिमाग और ब्लड प्रेशर पर सीधा असर डालती है. समय पर इलाज न होने पर जोखिम कई गुना बढ़ सकता है.

कम ही लोग जानते हैं कि तेज और लगातार खर्राटों का सीधा संबंध दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर से भी होता है. नींद के दौरान जब सांस में बार-बार रुकावट आती है, तो शरीर पर दबाव बढ़ता है और हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है. इससे लंबे समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि जो लोग खर्राटों के साथ हाई बीपी से भी जूझ रहे हैं, उन्हें इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह शरीर की ओर से एक चेतावनी हो सकती है.
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मोटापा खर्राटों की एक बड़ी वजह माना जाता है. गर्दन और गले के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी सांस की नली को संकरा कर देती है, जिससे हवा के प्रवाह में रुकावट आती है. इसके अलावा शराब पीना, धूम्रपान और अनियमित नींद की आदतें भी इस समस्या को बढ़ाती हैं. अच्छी बात यह है कि वजन कम करने, शराब और सिगरेट छोड़ने तथा सोने की सही पोजीशन अपनाने से खर्राटों में काफी सुधार हो सकता है. यानी कई मामलों में यह बीमारी नहीं, बल्कि खराब जीवनशैली का नतीजा भी हो सकता है.

नाक का बंद रहना, साइनस की समस्या, टॉन्सिल का बढ़ना या गले की बनावट में कोई दिक्कत भी खर्राटों का कारण बन सकती है. जब नाक से हवा आसानी से नहीं गुजर पाती, तो मुंह से सांस लेनी पड़ती है और आवाज पैदा होती है. बच्चों में बढ़े हुए टॉन्सिल भी तेज खर्राटों की वजह बनते हैं. ऐसे मामलों में ईएनटी डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है. सही जांच और इलाज से यह समस्या पूरी तरह ठीक भी हो सकती है.

अगर खर्राटे कभी-कभार आते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन रोज तेज आवाज में खर्राटे आना, नींद में सांस रुकना, सुबह सिरदर्द होना, दिन में अत्यधिक नींद या लगातार थकान महसूस होना खतरे के संकेत हैं. ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है. समय पर जांच से बड़ी बीमारियों को रोका जा सकता है. खर्राटों को मजाक न समझें, क्योंकि यही आपकी सेहत का पहला अलार्म हो सकता है.