सावधान! यूरिक एसिड बढ़ा है तो ‘जहर’ समान हैं ये 4 सब्जियां, तीर की तरह चुभेंगे जोड़ों के दर्द, आज ही किचन से करें बाहर

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Avoid these Foods in Uric Acid: आजकल बहुत लोग यूरिक एसिड की समस्या से परेशान हैं. जवान व्यक्ति भी जोड़ों के दर्द से कराहने लगे हैं. यह सब तब होता है जब आपके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाए. शरीर में जब प्यूरिन की मात्रा बढ़ती है तो यही टूटकर यूरिक एसिड बन जाता है और यही जोड़ों के पास जाकर क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है. जब यब बढ़ता है तो जोड़ों में तीर की तरह चुभने वाला दर्द होता है. इस स्थिति में यदि आप इन 3 चीजों को खाएंगे तो और दर्द जहर के समान है.

हमें हर रोज 50 से 60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. इसके लिए हम दाल, चावल, हरी सब्जियां, दूध, अंडा, मटन, पनीर आदि खाते हैं. लेकिन जब ये चीजें पेट में जाकर टूटता है तो इससे प्यूरिन बनता है. यही प्यूरिन यूरिक एसिड में बदल जाता है. अमूमन यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है लेकिन जब यूरिक एसिड की मात्रा शरीर में बढ़ने लगती है तो यह क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जमा होने लगता है. यह बहुत हार्ड हो जाता है और इस कारण तीर की तरह चुभने वाला दर्द होता है. इसलिए अगर किसी को यूरिक एसिड की समस्या है और वह इन तीन तरह की सब्जियों को खाता है तो ये अच्छी सब्जी भी जहर की तरह होने लगती है. (सांकेतिक तस्वीर)

कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जिनसे प्यूरिन की मात्रा ज्यादा बनती है. कुछ खाने की चीजों में प्राकृतिक रूप यह केमिकल पाया जाता हैं. जब शरीर इन प्यूरिन को तोड़ता है, तो यूरिक एसिड बनता है. अगर किडनी इसे फिल्टर नहीं कर पाती, तो शरीर में वेस्ट जमा होने लगता है. आइए इन सब्जियों के बारे में जानते हैं.(सांकेतिक तस्वीर)

पालक : पालक उन सब्जियों में से एक है जो यूरिक एसिड बढ़ाती है. हरी सब्जियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं. ऐसे में पालक बेहद पौष्टिक तत्व माना जाता है. इसमें प्रोटीन के अलावा कई तरह के विटामिन होते हैं जो शरीर को हर तरह से फायदे पहुंचाते हैं लेकिन पालक में प्यूरीन ज्यादा होता है. इसलिए जिन लोगों को यूरिक एसिड की समस्या है, अगर वे पालक खाते हैं तो उनके जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है. (सांकेतिक तस्वीर)

पालक : पालक उन सब्जियों में से एक है जो यूरिक एसिड बढ़ाती है. हरी सब्जियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं. ऐसे में पालक बेहद पौष्टिक तत्व माना जाता है. इसमें प्रोटीन के अलावा कई तरह के विटामिन होते हैं जो शरीर को हर तरह से फायदे पहुंचाते हैं लेकिन पालक में प्यूरीन ज्यादा होता है. इसलिए जिन लोगों को यूरिक एसिड की समस्या है, अगर वे पालक खाते हैं तो उनके जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है. (सांकेतिक तस्वीर)

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मशरूम: मशरूम एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है. मशरूम में वसा और कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अच्छा हिस्सा माना जाता है. हालांकि यूरिक एसिड की समस्या वाले लोगों को मशरूम सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से खाना चाहिए, क्योंकि इसमें प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बनाते हैं, जिससे गाउट और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए मशरूम से परहेज करें तो ज्यादा बेहतर है. (सांकेतिक तस्वीर)

मशरूम: मशरूम एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है. मशरूम में वसा और कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अच्छा हिस्सा माना जाता है. हालांकि यूरिक एसिड की समस्या वाले लोगों को मशरूम सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से खाना चाहिए, क्योंकि इसमें प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बनाते हैं, जिससे गाउट और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए मशरूम से परहेज करें तो ज्यादा बेहतर है. (सांकेतिक तस्वीर)

फूलगोभी: फूलगोभी कैंसर सहित कई बीमारियों के जोखिम को कम करने वाली सब्जी है. सर्दी में हर घर में फूलगोभी बनती ही है. लेकिन फूलगोभी में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. फूलगोभी या क्रुसीफेरस सब्जियां उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनमें यूरिक एसिड पहले से बढ़ा हुआ होता है. फूलगोभी का अधिक सेवन यूरिक एसिड लेवल और बढ़ा सकता है, जिससे गाउट, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए यूरिक एसिड के मरीजों को फूलगोभी कम मात्रा में, वह भी कभी-कभार और उबालकर या हल्की सब्ज़ी के रूप में ही खानी चाहिए. गंभीर समस्या होने पर इसे पूरी तरह टालना बेहतर होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

फूलगोभी: फूलगोभी कैंसर सहित कई बीमारियों के जोखिम को कम करने वाली सब्जी है. सर्दी में हर घर में फूलगोभी बनती ही है. लेकिन फूलगोभी में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. फूलगोभी या क्रुसीफेरस सब्जियां उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनमें यूरिक एसिड पहले से बढ़ा हुआ होता है. फूलगोभी का अधिक सेवन यूरिक एसिड लेवल और बढ़ा सकता है, जिससे गाउट, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए यूरिक एसिड के मरीजों को फूलगोभी कम मात्रा में, वह भी कभी-कभार और उबालकर या हल्की सब्ज़ी के रूप में ही खानी चाहिए. गंभीर समस्या होने पर इसे पूरी तरह टालना बेहतर होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

हरी मटर: हरी मटर पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-के और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन गठिया के मरीजों को इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए. हरी मटर में प्यूरीन मध्यम मात्रा में होते हैं, जो शरीर में जाकर यूरिक एसिड बना सकते हैं. अधिक मात्रा में सेवन करने से यूरिक एसिड बढ़ सकता है, जिससे जोड़ों का दर्द, सूजन और अकड़न बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए गठिया के मरीज हरी मटर कभी-कभार, कम मात्रा में और अच्छी तरह पकाकर खाएं. दर्द बढ़ने पर या यूरिक एसिड ज्यादा होने पर इसे कुछ समय के लिए टालना बेहतर होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

हरी मटर: हरी मटर पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-के और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन गठिया के मरीजों को इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए. हरी मटर में प्यूरीन मध्यम मात्रा में होते हैं, जो शरीर में जाकर यूरिक एसिड बना सकते हैं. अधिक मात्रा में सेवन करने से यूरिक एसिड बढ़ सकता है, जिससे जोड़ों का दर्द, सूजन और अकड़न बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए गठिया के मरीज हरी मटर कभी-कभार, कम मात्रा में और अच्छी तरह पकाकर खाएं. दर्द बढ़ने पर या यूरिक एसिड ज्यादा होने पर इसे कुछ समय के लिए टालना बेहतर होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

यूरिक एसिड को कम करने के लिए क्या करें: डॉ. बताते हैं कि यूरिक एसिड को कम करने के लिए सबसे पहले ज्यादा से ज्यादा पानी पिए ताकि खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़े तो यह आसानी से पेशाब के रास्ते बाहर आ सके. दिनभर में 2.5–3 लीटर पानी पिएं. दूध भी फुल क्रीम न खाएं. लो-फैट दूध, दही, छाछ जैसे डेयरी उत्पाद लें, इसके बजाय फल-सब्ज़ियां खाएं, खासकर चेरी, सेब, पपीता, नींबू, आंवला, खीरा इसके लिए परफेक्ट है. (सांकेतिक तस्वीर)

यूरिक एसिड को कम करने के लिए क्या करें: डॉ. बताते हैं कि यूरिक एसिड को कम करने के लिए सबसे पहले ज्यादा से ज्यादा पानी पिए ताकि खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़े तो यह आसानी से पेशाब के रास्ते बाहर आ सके. दिनभर में 2.5–3 लीटर पानी पिएं. दूध भी फुल क्रीम न खाएं. लो-फैट दूध, दही, छाछ जैसे डेयरी उत्पाद लें, इसके बजाय फल-सब्ज़ियां खाएं, खासकर चेरी, सेब, पपीता, नींबू, आंवला, खीरा इसके लिए परफेक्ट है. (सांकेतिक तस्वीर)

वजन संतुलन में रखें-यूरिक एसिड को कम करने के लिए हर हाल में वजन कम करना होगा. हाई यूरिक एसिड की समस्या में वजन कम करना इसलिए ज़रूरी होता है क्योंकि ज़्यादा वजन शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाता है और किडनी की उसे बाहर निकालने की क्षमता को कम करता है. मोटापे से इंसुलिन रेज़िस्टेंस बढ़ती है, जिससे यूरिक एसिड शरीर में जमा होने लगता है. इसके अलावा अतिरिक्त वजन जोड़ों पर दबाव डालता है, जिससे गाउट और गठिया का दर्द और बढ़ सकता है. वजन संतुलन में आने से मेटाबॉलिज़्म सुधरता है, सूजन कम होती है और यूरिक एसिड लेवल कंट्रोल में रहने में मदद मिलती है.(सांकेतिक तस्वीर)

वजन संतुलन में रखें-यूरिक एसिड को कम करने के लिए हर हाल में वजन कम करना होगा. हाई यूरिक एसिड की समस्या में वजन कम करना इसलिए ज़रूरी होता है क्योंकि ज़्यादा वजन शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाता है और किडनी की उसे बाहर निकालने की क्षमता को कम करता है. मोटापे से इंसुलिन रेज़िस्टेंस बढ़ती है, जिससे यूरिक एसिड शरीर में जमा होने लगता है. इसके अलावा अतिरिक्त वजन जोड़ों पर दबाव डालता है, जिससे गाउट और गठिया का दर्द और बढ़ सकता है. वजन संतुलन में आने से मेटाबॉलिज़्म सुधरता है, सूजन कम होती है और यूरिक एसिड लेवल कंट्रोल में रहने में मदद मिलती है.(सांकेतिक तस्वीर) 

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