Spanish Super Cup final के बाद एम्बाप्पे का इशारा चर्चा में, बार्सिलोना अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

स्पेनिश सुपर कप फाइनल के बाद किलियन एम्बाप्पे ने अपने रियल मैड्रिड के साथियों से मैदान छोड़ने को कहा, ताकि उन्हें एफसी बार्सिलोना के खिलाड़ियों को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए ट्रॉफी उठाते न देखना पड़े। यह इशारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और फुटबॉल जगत में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई।
गौरतलब है कि यह घटना स्पेनिश सुपर कप फाइनल के तुरंत बाद की है, जहां बार्सिलोना ने खिताब अपने नाम किया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, एम्बाप्पे का यह कदम न सिर्फ विरोधी खेमे में बल्कि रियल मैड्रिड के भीतर भी कुछ लोगों को पसंद नहीं आया।
इस पूरे मामले पर बार्सिलोना के अध्यक्ष जोआन लापोर्ता ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा है कि एम्बाप्पे का व्यवहार उन्हें हैरान करने वाला लगा है। लापोर्ता के मुताबिक, जीत और हार दोनों ही स्थितियों में खिलाड़ियों को उदारता और सम्मान दिखाना चाहिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि खेल का मूल भाव यही है कि सामान्य और सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया जाए।
लापोर्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि बार्सिलोना ने जीत के बाद विरोधी टीम के प्रति सम्मान दिखाया है, इसी वजह से उन्हें एम्बाप्पे की प्रतिक्रिया समझ में नहीं आई। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया है कि हाल के एल क्लासिको मुकाबलों के चलते दोनों टीमों के बीच माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है।
गौरतलब है कि हाल ही में लीग मैच के दौरान भी दोनों टीमों के बीच भावनाएं काफी उफान पर थीं, जिसका असर इस फाइनल में भी दिखा है। लापोर्ता ने कहा है कि उन्होंने एम्बाप्पे का इशारा सीधे नहीं देखा, लेकिन वह यह समझते हैं कि हार के उस पल में रियल मैड्रिड के खिलाड़ी मानसिक रूप से काफी आहत रहे होंगे और उसी भावावेश में ऐसी प्रतिक्रिया सामने आई है।
बार्सिलोना अध्यक्ष के अनुसार, मैदान पर खेल के दौरान जो अंतर दिखा, वही रियल मैड्रिड की निराशा की बड़ी वजह रहा। उनका मानना है कि मैच के दौरान ही यह साफ हो गया था कि बार्सिलोना की पकड़ मजबूत है और जीत की संभावनाएं ज्यादा हैं, जिसे स्वीकार करना विरोधी टीम के लिए कठिन रहा है।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े मुकाबलों में भावनाएं चरम पर होती हैं, लेकिन खेल भावना बनाए रखना उतना ही जरूरी होता है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि एल क्लासिको जैसी प्रतिद्वंद्विता में मैदान के बाहर के दृश्य भी उतने ही मायने रखते हैं, जितना खेल के भीतर का प्रदर्शन हैं।

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