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Khargone Ganesh Pandals: खरगोन में गणेश उत्सव के दौरान न सिर्फ भक्तों द्वारा भगवान गणेश की विभिन्न स्वरूपों में स्थापित की प्रतिमाएं भक्तों को आकर्षित करती रहीं. पांडाल भी विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे. देखें तस्वीरें…
गणेश उत्सव की धूम हर जगह है. खरगोन में भी गली मोहल्लों और घर, दुकानों में भगवान की स्थापना की गई है. वहीं, जिले के अलग अलग क्षेत्रों में श्रद्धालुओं द्वारा स्थापित गणेश प्रतिमाएं एवं पंडाल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने है. यहां रोजाना सैकड़ों भक्त दर्शन, पूजन के साथ सेल्फी लेने पहुंच रहे है.

खरगोन जिले के भीकनगांव में श्री गणेश युवा मित्र मंडल ने इस वर्ष महाभारत लिखते हुए गणेश प्रतिमा की स्थापना की. वहीं, सदस्यों ने महाकाल लोक की तर्ज पर शिवलोक में बप्पा को विराजित किया है. यहां रोजाना सैकड़ों भक्त बप्पा के इस स्वरूप के दर्शन करने आ रहे है.

जिले की धार्मिक एवं पवित्र नगरी महेश्वर के पांचवाड़ी मार्ग पर मिट्टी से राधा कृष्ण के रूप में बनी भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित की गई. यहां भगवान गणेश जी को ऐतिहासिक महेश्वर किले की आकृति के रूप में पंडाल सजाकर विराजित किया गया.

महेश्वर के ही गाड़ीखाना में भी भगवान गणेश की विशाल चतुर्भुज रूप में स्थापित की गई है. भगवान को लगभग 11 फिट ऊंचे राजसी सिंहासन पर विराजित किया है. पूरे पंडाल को आकर्षक लाइटिंग एवं फूलों से सजाया गया है. यह पंडाल गाढ़ी खाना के राजा के नाम से प्रसिद्ध है.

वही, खरगोन के ज्योतिनगर में बना पांडाल न सिर्फ शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भक्तों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां करीब 100 बाई 30 फीट के परिसर को हिंदवी साम्राज्य की स्थापना करने वाले महान सम्राट छत्रपति शिवाजी के किले का स्वरूप दिया गया है.

इस परिसर में बाप्पा की स्थापना के लिए बनाए 30 बाई 40 फीट के भव्य मंदिर में करीब 21 फीट उंची मूर्ति स्थापित की गई है. बाप्पा की मूर्ति पेषवाई ठाट से सिंहासन पर विराजित की गई है, जिसे देख भक्त शिवाजी के स्वरुप को निहार रहे हैं. किले की दीवारों पर देवी- देवताओं के चित्र लगाए गए हैं.

कसरावद में पहली बार उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की तर्ज पर भव्य पांडाल तैयार किया गया है. पंडाल में 11 फीट ऊंची सांवले रंग की चतुर्भुज गणेश प्रतिमा विराजमान की गई है, जो देखने पर शिव की तरह दिखाई देती है. पूरे पंडाल को आकर्षक लाइटिंग से सजे पंडाल की रौनक देखते ही बन रही है.

सूरज ढलते ही यहां का नजारा देख लगता है, जैसे आप उत्तराखंड के केदारनाथ धाम ही आ गए हो. वहीं, मंदिर के सामने नंदी भी विराजित किए गए है. यहां इस बार 10 की जगह 12 दिन तक भगवान की आराधना-पूजा की जाएगी.
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