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Chhatarpur News: राजेश बताते है कि वह ग्राम सुधार समिति एनजीओ के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग बंद करने के लिए जागरूक करते है. राजेश का उद्देश्य केवल पैसे कमाना नहीं है. वह किसानों को देसी खाद के प्रति जागरूक कर रहे है. जिससे किसान खुद खाद बनाकर तैयार कर सकते है. इससे उनका पैसा और समय दोनों बचेंगे और फसलें बिना रासायनिक खाद के उगाई जा सकेंगी.
सतना के राजेश ने पिछले 4 सालों से बकरामृत खाद बनाकर न केवल खुद की कमाई बढ़ाई है, बल्कि किसानों को भी लाभ पहुंचाया है. वह किसानों को ऑर्गेनिक खाद बनाने के लिए प्रेरित करते है. जिससे किसान बाजार से खाद नहीं खरीदते और सीधे उनसे खरीदते है. इससे किसानों की फसलों में भी फायदा हो रहा है और उनकी आय बढ़ रही है. राजेश किसानों को बकरामृत खाद बनाने के लिए प्रेरित करते है और अन्य शहरों में जाकर 20 रुपए किलो की दर से खाद बेचते है. जिससे उन्हें महीने में ₹50000 की कमाई होती है.
राजेश बताते है कि वह ग्राम सुधार समिति एनजीओ के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग बंद करने के लिए जागरूक करते है. राजेश का उद्देश्य केवल पैसे कमाना नहीं है. वह किसानों को देसी खाद के प्रति जागरूक कर रहे है. जिससे किसान खुद खाद बनाकर तैयार कर सकते है. इससे उनका पैसा और समय दोनों बचेंगे और फसलें बिना रासायनिक खाद के उगाई जा सकेंगी. वह किसानों को खाद के अलावा ब्रह्मास्त्र जैसे कीटनाशक बनाना भी सिखाते है.
किसान घर पर ही बना सकते हैं खाद
राजेश बताते है कि अगर किसानों के पास बकरी पालन है तो वे बकरा और बकरी की लेड़ी से बकरामृत खाद बना सकते है. इसे तैयार करना भी आसान है और खर्च भी नहीं आता. यह खाद सब्जियों की वृद्धि के लिए सबसे असरदार मानी जाती है.
ऐसे बनाते हैं खाद
राजेश बताते हैं कि बकरामृत खाद के लिए बकरा और बकरी की लेड़ी, लकड़ी की राख और महुआ या सरसों की खली चाहिए होती है. इन तीनों को मिलाकर 10 से 12 दिन एक ड्रम या नांद में सड़ने दें. जब यह पूरी तरह सड़ जाए तो इसे छायादार जगह में सुखाकर लड्डू बना दें, ताकि खाद में नमी बनी रहे.
सब्जी के लिए वरदान है ये खाद
इस खाद को पैकेजिंग कर सकते हैं या सीधे सब्जी के खेत में डाल सकते है. अगर ज्यादा मात्रा में खाद है, तो चना, सरसों, गेहूं की फसलों में भी उपयोग कर सकते है. यह खाद सब्जियों के लिए वरदान साबित होती है.
महीने की 50 हज़ार रुपए कमाई
राजेश बताते है कि वह एनजीओ ग्राम सुधार समिति से जुड़े है और कई प्रोडक्ट बनाकर बेचते है. जिसमें बकरामृत खाद भी शामिल है. इन सब से उनकी मासिक कमाई ₹50000 तक हो जाती है. वह केवल खुद कमाई नहीं करते, बल्कि किसानों को भी आय बढ़ाने के लिए जागरूक करते है.
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