बजट में आयुष सेक्टर को मिला बूस्ट,आयुर्वेद के अलावा किन पद्धतियों से होता है इलाज और कैसे? जानें

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AYUSH Systems of medicine in Budget 2026-27: बजट 2026-27 में आयुष को 4408 करोड़ आवंट‍ित क‍िए गए हैं. इस दौरान देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है. इसके साथ ही जामनगर WHO केंद्र अपग्रेड करने की भी तैयारी है. क्‍या आपको पता है क‍ि आयुष में स‍िर्फ आयुर्वेद से इलाज नहीं होता बल्‍क‍ि 6 अन्‍य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां भी शाम‍िल हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में…

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बजट में आयुष को 4500 करोड़ रुपये आवंट‍ित क‍िए गए हैं. जानें आयुष के तहत क‍िस क‍िस च‍िक‍ित्‍सा पद्धत‍ि के तहत इलाज होता है?

Budget 2026-27 for AYUSH: बजट 2026-27 में आयुष सेक्टर को बड़ा बूस्ट दिया गया है. इस बार आयुष को आवंटित किए गए 4408 करोड़ रुपये बजट में पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है. जहां देश के अन्य राज्यों में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है, वहीं आयुष फार्मेसी और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने की बात भी की गई है, लेकिन क्या आपको पता है कि आयुष सेक्टर में सिर्फ आयुर्वेद या आयुर्वेदिक उपचार ही नहीं आता है बल्कि भारत की कई अन्य प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां भी आती हैं, जिनसे गंभीर से गंभीर लाइफस्टाइल बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है.

पहले जानते हैं बजट में आयुष को क्या-क्या मिला?
आपको बता दें कि बजट 2026-27 में आयुर्वेद में अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा, शोध और उच्च स्तर के इलाज की क्षमता बढ़ाने के लिए 3 नए ऑल इंडिया आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है. ये संस्थान कहां खोले जाएंगे इसका फैसला अभी नहीं किया गया है, बल्कि कई पैरामीटर तय किए गए हैं.

बजट में आयुष फार्मेसी और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाया जाएगा कि आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक दवाओं की गुणवत्ता तय की जा सके और कुशल कर्मियों के लिए रोजगार पैदा हो सके. इसके अलावा जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को अपग्रेड करने की बात कही गई है. जिससे पारंपरिक चिकित्सा में प्रमाण-आधारित शोध, प्रशिक्षण और वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़े.

बजट में प्रस्तावित पांच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज्म हब्स में आयुष केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां जांच, इलाज के बाद की देखभाल और पुनर्वास के साथ AYUSH सेवाओं को मेडिकल टूरिज्म से जोड़ा जाएगा. बुज़ुर्गों और सहायक देखभाल के लिए नए स्वास्थ्य तंत्र में वेलनेस और योग को जरूरी कौशल के रूप में शामिल किया जाएगा. इसके तहत NSQF से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अगले वर्ष 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा.

इस बारे में केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि इस बजट में पिछले साल के बजट की तुलना में आयुष के बजट में खासतौर पर 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है. हमारी पारंपरिक उपचार पद्धतियां दोनों तरह से काम करती हैं. ये प्रिवेंटिव हैं यानि बचाव भी करती हैं और बीमारी होने के बाद क्यूरेटिव हैं यानि उपचार भी करती हैं.

वहीं अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई द‍िल्‍ली के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा, ‘हमारे लिए हर्ष का विषय है कि केंद्र सरकार ने 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की है और आयुष में बजट बढ़ाया गया है. जैसे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद नई दिल्ली और गोवा ने लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स और क्रॉनिक बीमारियों के मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाई है, ऐसे ही अब अन्य राज्यों में नए एआईआईए बनने से बहुत सारे मरीजों को फायदा मिलेगा.

आयुष में कौन-कौन सी चिकित्सा पद्धतियों से होता है इलाज?
अगर आपको भी लगता है कि आयुष का मतलब सिर्फ आयुर्वेद है तो ऐसा नहीं है. आयुष के अंतर्गत भारत की 6 प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां आती हैं, जिनके तहत बीमारियों से बचाव के लिए उपाय बताने के साथ ही इलाज किया जाता है.आइए जानते हैं इनके बारे में…

  1. ए यानि आयुर्वेद- भारत की पांच हजार साल से भी ज्यादा पुरानी ये इस चिकित्सा पद्धति का जनक भगवान धन्वंतरि को माना जाता है. जबकि जिस चरक संहिता को आयुर्वेद का प्रमुख ग्रंथ माना जाता है, उसके रचयिता आचार्य चरक हैं. आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा भी शामिल है, जिसके जनक महर्षि सुश्रुत हैं. यह भारतीय चिकित्सा वात, पित्त और कफ जैसे तीन दोषों पर आधारित है और उनको संतुलित करने के उपाय बताती है.
  2. वाई यानि योग और प्राकृतिक चिकित्सा-भारत की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धियों में से एक योग को विज्ञान माना जाता है और इसके जनक महर्षि पतंजलि हैं. इन्होंने पतंजलि योग सूत्र की रचना की. यह विधि अष्टांग योग यानि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की व्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से शरीर को निरोग रखती है. जबकि प्राकृतिक चिकित्सा कुदरती और प्रकृति के अनुरूप खुद को ढालने से होने वाला उपचार है. इसके प्रणेता महातमा गांधी को माना जाता है, हालांकि इसकी जड़ें भारत में काफी गहरी हैं.
  3. यू यानि यूनानी चिकित्सा प्रणाली, यह हिप्पोक्रेट्स और गैलेन के सिद्धांतों पर आधारित है. यह शरीर के चार प्रमुख तरल पदार्थों रक्त, कफ, पीला पित्त, काला पित्त को संतुलित कर, प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, आहार (इलाज-बिल-गीधा) और जीवनशैली (इलाज-बिल-तदबीर) के माध्यम से रोगों का इलाज करती है. यह शरीर की प्राकृतिक चिकित्सा शक्ति पर ध्यान केंद्रित करती है.
  4. एस यानि सिद्ध- दक्षिण भारत के तमिलनाडु में विकसित इस चिकित्सा पद्धति में इलाज के लिए खनिजों जैसे पारा गंधक और जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है. यह भी 5 से 7 हजाररर साल पुरानी प्रणाली है. यह शरीर में वात, पित्त, कफ के संतुलन पर आधारित है. यह शारीरिक, मानसिक के साथ आध्यात्मिक कल्याण पर भी फोकस करती है.
  5. एस यानि सोवा रिग्पा- करीब 2500 साल पुरानी भारत उत्तरी हिस्से तिब्बत, भूटान, नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित एक प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है. जिसे आमची चिकित्सा या सोवा रिग्पा के रूप में भोटी भाषा में चिकित्सा का विज्ञान कहा जाता है. कहा जाता है कि इसके जनक भगवान बुद्ध हैं. भारत सरकार ने इसे 2010 में आयुर्वेद के तहत एक स्वतंत्र पारंपरिक चिकित्सा के रूप में आधिकारिक मान्यता दी थी. इसमें वायु, पृथ्वी और जल तत्व को संतुलित किया जाता है. साथ ही नाड़ी परीक्षा, मूत्र विश्लेषण, और जीभ की जांच कर उपचार किया जाता है.
  6. एच यानि होम्योपैथी 200 साल पहले डॉ. सैमुअल हैनिमैन ने इसकी खोज की थी. यह लाइक क्योर लाइक’ (similia similibus curentur) के सिद्धांत पर काम करती है. यानि जिस चीज से किसी को रोग उत्पन्न हुआ है, वही चीज उस व्यक्ति को स्वस्थ भी बना सकती है. इसके लिए दवा को ज्यादा से ज्यादा बार डायल्यूट करके इलाज किया जाता है. आज भारत में यह काफी प्रचलित है और कई गंभीर बीमारियों का इलाज करती है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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