आर्मी की वर्दी रह गई अधूरी… 70 हजार से शुरू हुआ सफर, आज खंडवा में लाखों की कमाई कर रहा है ये युवक!

Success Story: सरकारी नौकरी और आर्मी में जाने का सपना हर युवा देखता है. कोई इसे पूरा कर लेता है, तो कोई हालात के आगे मजबूर हो जाता है. खंडवा के सुमित पाटिल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां सपना टूटा, लेकिन हौसला नहीं. सुमित का एक ही सपना था देश की सेवा करना. इसके लिए उन्होंने चार बार आर्मी की भर्ती दी, दो बार एक्सीलेंट भी किया. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2016 में जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनकी पूरी दिशा बदल दी.

पिता के जाने से टूट गया सहारा
साल 2016 में सुमित के पिता रमेश पाटिल को अचानक ब्रेन हेमरेज हुआ और उनका निधन हो गया. घर की हालत एक झटके में बदल गई. मां अकेली रह गईं, आर्थिक जिम्मेदारी बढ़ गई और सुमित गहरे डिप्रेशन में चले गए. आर्मी की नौकरी जॉइन करने का वक्त आया, लेकिन सुमित को मां और घर की जिम्मेदारी के लिए वापस लौटना पड़ा. सपना छोड़ा, लेकिन मजबूरी में.

पढ़ाई पूरी की, लेकिन नौकरी से नहीं बनी बात
आर्मी का सपना छोड़ने के बाद सुमित ने खुद को संभाला और पढ़ाई पूरी की. उन्होंने पॉलिटेक्निक डिप्लोमा किया. कुछ समय तक गाड़ियों की खरीदी-बिक्री में हाथ आजमाया, लेकिन वहां मन नहीं लगा और कमाई भी स्थिर नहीं रही. तब उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया अब नौकरी नहीं, खुद का काम करेंगे.

70 हजार से रखी दुकान की नींव
साल 2019-20 में सुमित ने खंडवा में किराए पर एक छोटी-सी दुकान ली. नाम रखा खाटू श्याम डेंटिंग, पेंटिंग एंड मेकेनिकल वर्क शॉप. जेब में ज्यादा पैसे नहीं थे, करीब 60 से 70 हजार रुपए लगाकर काम शुरू किया. डेंटिंग-पेंटिंग का काम उन्होंने अपने गुरु से सीखा, जो आज भी उनके साथ काम कर रहे हैं. एक्सीडेंटल गाड़ियों की मरम्मत, फुल बॉडी पेंट और मैकेनिकल रिपेयर—सब कुछ धीरे-धीरे सीखते गए.

पुरानी कार को बनाते हैं नई जैसी
आज सुमित की वर्कशॉप पर एक्सीडेंटल गाड़ियों का पूरा काम होता है. सुमित कहते हैं कि आप पुरानी कार लाइए, हम उसे ऐसी बनाकर देंगे कि लगे शो-रूम से अभी निकली है.” खास बात यह है कि फैमिली यूज कारों के लिए उनकी दुकान पर सिर्फ 15 हजार रुपए में फुल कार री-पेंट का ऑफर चलता है, जो खंडवा में कहीं और नहीं मिलता.

महीने की कमाई लाखों में
सुमित हर महीने 6 से 7 गाड़ियों की फुल बॉडी पेंटिंग करते हैं. रोजाना डेंटिंग और एक्सीडेंटल काम से उनकी कमाई 3 से 3,500 रुपए तक पहुंच जाती है, जो महीने में लाखों में बदल जाती है. आज वे सिर्फ खुद आत्मनिर्भर नहीं हैं, बल्कि 4 से 5 युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं.

अधूरा सपना, लेकिन पूरी जीत
सुमित मानते हैं कि देश की सेवा का सपना अधूरा रह गया. लेकिन वे कहते हैं कि अब यही काम मेरा मिशन है. मां खुश है, परिवार खुश है बस यही मेरी सबसे बड़ी जीत है. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए सीख है, जो हालात से डरकर रुक जाते हैं. मेहनत और ईमानदारी हो, तो 70 हजार की शुरुआत भी लाखों की कमाई में बदल सकती है.

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