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गोल-मटोल पेट आपकी पर्सनैलिटी पर असर डाल रहा है? अगर आप बिना जिम जाए और बिना महंगी डाइट अपनाए वजन घटाना चाहते हैं, तो आपकी थाली में एक छोटा-सा बदलाव बड़ा फर्क ला सकता है. गेहूं की रोटी की जगह सही आटे से बनी रोटी अपनाने से पाचन बेहतर होता है, चर्बी घटने लगती है और सिर्फ एक महीने में पेट अंदर होने का असर नजर आने लगता है. सही आटा और सही आदतें मिलकर रोज़मर्रा की डाइट को असरदार बना देती हैं.
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और गलत खानपान के कारण अधिकांश लोग पेट की चर्बी की समस्या से जूझ रहे हैं. बाहर निकला पेट न केवल देखने में खराब लगता है, बल्कि यह धीरे-धीरे सेहत से जुड़ी कई गंभीर परेशानियों को भी बढ़ावा देता है.

पेट पर जमा चर्बी शरीर के अंदरूनी अंगों पर दबाव बनाती है, जिससे थकान, सांस फूलना और सुस्ती जैसी समस्याएं होने लगती हैं. अगर समय रहते वजन को नियंत्रित न किया जाए, तो शुगर और हार्ट से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है.

भारतीय भोजन में रोटी का खास महत्व होता है. अधिकतर लोग रोजाना गेहूं की रोटी खाते हैं, लेकिन वजन घटाने के लिए इसमें बदलाव जरूरी है. सही आटे का चुनाव आपकी सेहत पर बड़ा असर डाल सकता है.
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रागी से बनी रोटी पेट को लंबे समय तक भरा रखती है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. यह पचाने में हल्की होती है और शरीर में चर्बी जमा होने से रोकने में मदद करती है.

रागी धीरे-धीरे शरीर को ऊर्जा देता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता. इसी वजह से यह वजन और डायबिटीज दोनों को नियंत्रित करने में मदद करता है. रोजाना सेवन करने से शरीर संतुलन में बना रहता है.

अगर रागी की रोटी के साथ सब्जी, दाल और सलाद खाया जाए तो शरीर को पूरा पोषण मिलता है. ऐसा हल्का भोजन पेट पर बोझ नहीं डालता और कुछ ही समय में वजन कम होने लगता है.

वजन घटाने के दौरान तले-भुने खाने, ज्यादा तेल, मीठी चीजों और मैदे से दूरी बनाना जरूरी है. जब खानपान सादा होगा, तो पेट की चर्बी तेजी से कम होगी और शरीर हल्का महसूस करेगा.