शिवांक द्विवेदी, सतना: ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ साथ पशुपालन आज किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना पशुपालकों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. इस योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर नस्ल के पशु, डेयरी प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है. इससे ग्रामीण परिवारों को न सिर्फ रोजगार मिल रहा है बल्कि डेयरी व्यवसाय को भी नया विस्तार मिल रहा है. सतना जिले में भी कई पशुपालक इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आधुनिक डेयरी मॉडल की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल
सरकार द्वारा शुरू की गई डेयरी प्लस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराना है. इस योजना के तहत पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है. इसमें पशु खरीदने से लेकर चारा प्रबंधन, डेयरी उपकरण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन को अपनाते हैं और बेहतर नस्ल के पशुओं का उपयोग करते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक मजबूत आधार बन सकता है.
योजना के तहत मिलती है आर्थिक सहायता
लोकल 18 से बातचीत में पशुपालन एवं डेयरी विभाग सतना के अधिकारी डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि डेयरी प्लस योजना वर्ष 2025-26 से लागू की गई है. इसके तहत डेयरी व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी को 1,47,500 रुपये का ड्राफ्ट बनाकर विभाग में जमा करना होता है जबकि सरकार भी उतनी ही राशि मिलाती है. इस तरह पूरी योजना की लागत लगभग 2,95,000 रुपये होती है.
इस योजना के तहत लाभार्थी को हरियाणा या पंजाब से मुर्रा नस्ल की दो भैंसें उपलब्ध कराई जाती हैं. खास बात यह है कि लाभार्थी को भैंस खरीदने के लिए बाहर जाने का खर्च जैसे ट्रेन या बस किराए के साथ साथ रहने खाने का खर्च भी सरकार द्वारा दिया जाता है. पशुपालक वहां जाकर खुद भैंस पसंद करते हैं उस पर टैग लगाया जाता है और बाद में सप्लायर द्वारा भैंस को सीधे लाभार्थी के घर तक पहुंचाया जाता है.
दूध उत्पादन में हो रहा अच्छा फायदा
डॉ. साहब ने बताया कि पिछले वर्ष सतना जिले को इस योजना के तहत 20 लाभार्थियों का लक्ष्य मिला था जिसे समय रहते पूरा कर लिया गया. योजना के तहत लाई गई मुर्रा नस्ल की भैंसें प्रतिदिन 14 से 16 लीटर तक दूध दे रही हैं जिससे पशुपालकों को अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है. उनका कहना है कि यदि किसान आधुनिक डेयरी प्रबंधन और बेहतर नस्ल के पशुओं को अपनाते हैं तो डेयरी व्यवसाय बहुत लाभदायक साबित हो सकता है.
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के लिए पात्रता मानदंड भी काफी सरल रखे गए हैं. जो किसान पहले से पशुपालन कर रहे हैं या जिनके पास पहले से एक-दो गाय या भैंस हैं और वे दूध का व्यवसाय करते हैं वे भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं. हालांकि एक परिवार से केवल एक व्यक्ति ही योजना का लाभ ले सकता है. आवेदन करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु अस्पताल प्रभारी या जिला पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक कार्यालय में जाना होगा. वहां से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर आवश्यक जानकारी भरकर दस्तावेजों के साथ जमा करना होता है. आवेदन जमा करने के बाद रसीद या पावती लेना भी जरूरी होता है.
जरूरी दस्तावेज और सब्सिडी
योजना में आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है. इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो तो, बैंक पासबुक की कॉपी और भूमि से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं. योजना के तहत सब्सिडी भी अलग अलग श्रेणियों के अनुसार दी जाती है. सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है. आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु 21 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है.
नागौद क्षेत्र में मिल रहा अच्छा परिणाम
सतना जिले के नागौद विकासखंड के सहपुर गांव में भी इस योजना का अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है. यहां चंद्रिका पाल और पूजा पाल को डेयरी प्लस योजना के तहत भैंसें मिली हैं. चंद्रिका पाल के यहां मौजूद भैंसें प्रतिदिन 16 से 17 लीटर दूध दे रही हैं जबकि पूजा पाल के यहां भैंसों से 13 से 14 लीटर दूध मिल रहा है. इससे दोनों परिवारों की डेयरी आय में काफी वृद्धि हुई है और उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है. स्थानीय स्तर पर ऐसे उदाहरण अन्य किसानों को भी डेयरी व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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