अपराजिता के फूल सुंदर नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भंडार, दर्द–सूजन में कारगर

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अपराजिता का जो अपने नीले व सफेद किस्म के फूलों के लिए तो फेमस है. इसके साथ औषधीय गुणों पाए जाते हैं जिस वजह से इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. क्या हैं इसके फायदे जानें इस खबर में…

समस्तीपुर. प्रकृति ने मनुष्य को ऐसे अनगिनत पौधे, फूल और पत्तियां उपहार में दी हैं, जिनका नियमित उपयोग करके अनेक बीमारियों से राहत पाई जा सकती है. कई बार ऐसे रोग, जिनका इलाज महंगी अंग्रेजी दवाओं से भी संभव नहीं हो पाता, वे पारंपरिक जड़ी–बूटियों के माध्यम से काफी हद तक नियंत्रित या ठीक किए जाते हैं. इन्हीं में से एक पौधा है, अपराजिता, जो अपने नीले व सफेद किस्म के फूलों के लिए तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन इससे भी अधिक इसकी पहचान इसके औषधीय गुणों के कारण है.

समस्तीपुर जिले में किसान सुबोध कुमार बड़े स्तर पर अपराजिता की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने इसे सजावटी फूल के रूप में लगाया, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसके औषधीय महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इसे एक व्यावसायिक फसल के रूप में विकसित करना शुरू किया. आज उनके खेत में अपराजिता बड़ी मात्रा में उगाई जाती है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर जड़ी-बूटी बनाने वाले उद्योगों और आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में.

सुबोध बताते हैं कि अपराजिता की पत्तियों, जड़ों और फूलों का उपयोग कई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है. सबसे अधिक लोकप्रिय है, अपराजिता चाय, जिसे ‘ब्लू टी’ भी कहा जाता है. यह चाय बच्चों और छात्रों की याददाश्त बढ़ाने, मानसिक एकाग्रता सुधारने और तनाव कम करने में काफी सहायक मानी जाती है. इसके अलावा सर्दी-खांसी, जुकाम, हल्के बुखार, सिरदर्द और शरीर में सूजन की समस्या में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

आयुर्वेदाचार्य का क्या कहना है?
समस्तीपुर के आयुर्वेदाचार्य डॉ. रंजन बताते हैं कि अपराजिता को सामान्य पौधा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी–इंफ्लेमेटरी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि इसका उपयोग नींद न आने की समस्या (इंसोम्निया), भूलने की आदत, लगातार तनाव और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए प्रभावी माना जाता है. उन्होंने कहा कि इसका नीले रंग का फूल सबसे अधिक औषधीय माना गया है. इस फूल से बनाई जाने वाली चाय खून में मौजूद विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने, पाचन को बेहतर बनाने और त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मददगार साबित होती है. खास बात यह है कि अपराजिता का सेवन सही मात्रा में और सही विधि से किया जाए तो इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता.

खेती की ओर बढ़ रही किसानों की रुचि
सुबोध जैसे किसान अब अपराजिता की खेती को आय का एक मजबूत साधन मान रहे हैं. इसका रखरखाव आसान है, जलवायु अनुकूल हो तो उत्पादन भी अधिक मिलता है. बाजार में सूखे फूल, पाउडर और चाय के पैकेट की अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है. अपराजिता की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति की गोद में छिपे पौधे न केवल हमारी सेहत की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि किसानों को आर्थिक मजबूती भी दे सकते हैं.

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Mohd Majid

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अपराजिता के फूल सुंदर नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भंडार, दर्द–सूजन में कारगर

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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