MP NEWS: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में जब हर तरफ पानी की किल्लत थी, नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा था और शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही थी, तब एक आम महिला ने वो कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. यह कहानी है सिंधी कॉलोनी में रहने वाली गृहिणी अनीता धोत्रे की, जिन्हें आज लोग सम्मान से “खंडवा की झांसी की रानी” कहते हैं.
न कोई पद, न कोई संगठन… फिर भी सिस्टम से टकरा गईं अनीता धोत्रे
अनीता न तो किसी राजनीतिक पद पर हैं और न ही किसी बड़े संगठन का समर्थन उनके पास था. लेकिन उनके पास था हौसला और अपने शहर के हक के लिए लड़ने का जज्बा. जब नगर निगम से बार-बार शिकायत करने के बाद भी हालात नहीं बदले, तो उन्होंने अकेले दम पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे खंडवा शहर के लिए.
जब पानी बना ज़हर और जवाब मिला “देखते हैं”
अनीता बताती हैं कि कई इलाकों में हफ्तों तक पानी की सप्लाई बंद रहती थी. कभी आता भी था तो इतना गंदा और बदबूदार कि इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता. आवेदन, फोन, धरना–प्रदर्शन… सब कुछ किया गया, लेकिन हर बार जवाब मिला “देखते हैं, हो जाएगा”.
लेकिन कुछ भी नहीं हुआ.
19 जून 2019 से शुरू हुआ संघर्ष
19 जून 2019 को अनीता ने पहली बार पुलिस में आवेदन दिया. इसके बाद कई सालों तक वे अलग-अलग विभागों के चक्कर काटती रहीं. 2025 तक आते-आते उन्होंने तय कर लिया कि अब शिकायतों से नहीं, कानूनी लड़ाई से ही समाधान निकलेगा.
मई 2025: आम महिला पहुंची हाईकोर्ट
मई 2025 में अनीता ने हाईकोर्ट में PIL दाखिल की. हैरानी की बात यह रही कि सिर्फ 19 दिनों में कोर्ट ने फैसला सुना दिया. हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि नगर निगम दो हफ्ते में पाइपलाइन सुधारे, साफ और समय पर पानी की सप्लाई सुनिश्चित करे. यह फैसला सिर्फ अनीता के लिए नहीं, बल्कि पूरे खंडवा शहर के हक में था.
कंटेंप्ट केस से मचा हड़कंप
कोर्ट के आदेश के बाद भी जब हालात नहीं सुधरे, तो अनीता ने कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट लगा दिया. इसके बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया. अधिकारियों और नेताओं को समझ आ गया कि एक आम महिला भी सिस्टम से जवाब मांग सकती है.
दबाव, लालच और धमकी… लेकिन झुकी नहीं
अनीता को व्यक्तिगत तौर पर पानी की लाइन दे दी गई और कहा गया “अब आपकी समस्या हल हो गई, केस वापस ले लीजिए.” लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया. राजनीतिक दबाव बना, प्रलोभन दिए गए, धमकियां भी मिलीं, लेकिन उनका जवाब साफ था कि मेरी लड़ाई मेरी नहीं, पूरे खंडवा की है. दो बेटियों के साथ अकेली महिला, फिर भी अडिग अनीता अपनी दो छोटी बेटियों के साथ अकेली रहती हैं. रिश्तेदारों ने भी कहा कि दो बाल्टी पानी हम दे देंगे. लेकिन उनका सवाल था दो बाल्टी पानी तो कोई भी दे देगा, अपने अधिकारों के लिए कब लड़ेंगे?
पढ़ी-लिखी, जागरूक और समाजसेवी
अनीता सिर्फ गृहिणी नहीं हैं. उनके पास BA LLB, D.Ed, कथक में MA और पॉलिटिकल साइंस में MA जैसी उच्च शिक्षा है. वे आज भी लोगों को निशुल्क कानूनी सलाह देती हैं और समाजसेवा करती हैं.
हर घर से निकले एक झांसी की रानी
अनीता कहती हैं कि अगर मैं अकेली महिला होकर सिस्टम से लड़ सकती हूं, तो हर नागरिक अपने अधिकार के लिए खड़ा हो सकता है. आज खंडवा उन्हें “झांसी की रानी” इसलिए कहता है, क्योंकि उन्होंने साबित कर दिया कि सिस्टम से लड़ने के लिए ताकत नहीं, हौसले की जरूरत होती है.
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