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भिंड में नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण की मांग को लेकर 16 मार्च को बड़ा जनांदोलन होने जा रहा है. संत समाज के आवाहन पर किसान, व्यापारी, पूर्व सैनिक और सामाजिक संगठन बड़ी संख्या में शामिल होंगे. आंदोलन से पहले प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बैठक हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी. अब बरेठा टोल पर ‘रोड नहीं तो टोल नहीं’ के नारे के साथ प्रदर्शन की तैयारी है.
भिंड में नेशनल हाईवे को लेकर आंदोलन की तेयारी हो चुकी है.
भिंड. जिले में नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण की मांग को लेकर माहौल गर्म हो गया है. लंबे समय से खराब सड़क और अधूरे विकास कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. संत समाज के आवाहन पर 16 मार्च को बड़े जनांदोलन की घोषणा ने इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा बना दिया है. इस आंदोलन में भूतपूर्व सैनिक, समाजसेवी संगठन, किसान, व्यापारी और विपक्षी दलों के नेता शामिल होने वाले हैं. यही वजह है कि यह सिर्फ सड़क की मांग का आंदोलन नहीं बल्कि स्थानीय जनभावनाओं का बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है.
आंदोलन से पहले प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई. प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने कलेक्टर, स्थानीय विधायक, दंदरौआ धाम के महंत और आंदोलनकारियों के साथ बैठक की. करीब दो घंटे चली इस बैठक में NHAI और MPRDC के अधिकारी भी मौजूद रहे. हालांकि बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी. अधिकारियों ने फरवरी 2027 तक हाईवे चौड़ीकरण का काम शुरू होने की बात कही, लेकिन आंदोलनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए. इसी कारण अब आंदोलन की तैयारी और तेज हो गई है.
सड़क विकास बना राजनीतिक मुद्दा
भिंड और आसपास के क्षेत्रों में सड़क की स्थिति लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है. स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि हाईवे से टोल वसूली तो जारी है, लेकिन सड़क के विस्तार और सुधार का काम अपेक्षित गति से नहीं हुआ. इसी असंतोष ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है.
संत समाज की भूमिका से आंदोलन को धार
इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसका नेतृत्व संत समाज कर रहा है. संत समिति के जिला अध्यक्ष कालिदास महाराज ने साफ कहा है कि इस बार आंदोलन आर-पार का होगा. संत समाज के शामिल होने से आंदोलन को सामाजिक और नैतिक समर्थन मिला है, जिससे प्रशासन के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
‘रोड नहीं तो टोल नहीं’ बना नारा
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि सड़क चौड़ीकरण का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो टोल वसूली का विरोध किया जाएगा. बरेठा टोल प्लाजा को आंदोलन का केंद्र बनाया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सड़क की स्थिति सुधरती नहीं, तब तक टोल वसूली उचित नहीं है.
प्रशासन की चुनौती बढ़ी
आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था की चुनौती भी खड़ी हो गई है. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के लिए औपचारिक अनुमति नहीं मिली है, लेकिन आंदोलनकारी फिर भी बड़ी संख्या में जुटने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ सकती है.
स्थानीय राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है. यदि आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलता है तो विपक्ष इसे सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. वहीं सरकार के लिए भी यह जरूरी होगा कि वह सड़क विकास को लेकर ठोस और समयबद्ध योजना सामने रखे.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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