एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की मदद करती हैं आगनवाड़ी गायत्री, दर्जनो की बचाई जान, किराए के कमरे से करती हैं काम

Last Updated:

Gaytri Tiwari Success Story: ऐसी महिला जो पेशे से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और इनकी आंगनवाड़ी खजुराहो के जटकरा गांव में किराए के कमरे में चलती है. लेकिन सेवा का संकल्प ऐसा कि आज इनके वार्ड में कोई कुपोषित बच्चे नहीं, साथ ही अपनी सूझ-बूझ से एनेमिक महिलाओं की जान भी बचाती हैं.

ख़बरें फटाफट

छतरपुरः खजुराहो की गायत्री तिवारी जिन्होंने छतरपुर जिले में अपनी अलग ही पहचान बनाई है. दरअसल, गायत्री एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और खजुराहो के जटकरा गांव में किराए के एक कमरे में इनकी आंगनवाड़ी चलती है. ये उन महिलाओं का विशेष ध्यान देती हैं जो एनेमिक होती हैं. हाल ही में इन्होंने अपनी सूझ-बूझ से ऐसी महिलाओं की भी जान बचाई, जिनका ब्लड प्वाइंट बेहद ही कम था. ऐसी महिलाओं के साथ गायत्री तब तक साथ रहती हैं जब तक जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ नहीं हो जाते हैं.

महिलाओं को करती हैं जागरूक

गायत्री गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजक रहने की सलाह देती रहती हैं. वह कहती है कि बच्चों के कुपोषित होने के पीछे उनके माता-पिता दोषी होते हैं. जो माताएं पर्याप्त आहार नहीं लेती और आहार में विटामिन नहीं रहता और बार-बार बीमारी के संक्रमण के कारण कुपोषण होता है. कुपोषण का बच्चों के शरीर में बहुत घातक प्रभाव पड़ता है जिससे उनकी शारीरिक और बौद्धिक वृद्धि में रुक बताती है.

गायत्री बताती है कि उनके वार्ड के बच्चे कुपोषित ना हो इसके लिए वह बच्चों का नियमित रूप से वजन और लंबाई मापती है. माता-पिता को स्वस्थ आहार और पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है. वहीं आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चों को पूरा आहार दिया जाता है. माता को स्तनपान के महत्व के बारे में बताते हुए उन्हें स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

एनेमिक महिलाओं की बचाई जान 

जटकरा गांव की रहने वाली माया बताती हैं कि हम महाराष्ट्र के पूना में रहते थे, वहीं मैं और मेरे पति काम करते थे. मैं प्रेग्नेंट थी, डिलीवरी के लिए अपने गांव आई थी. डिलीवरी के 4 दिन पहले आंगनवाड़ी आई थी. यहां से गायत्री दीदी ने जब खून चेक करवाया तो 7.5 प्वाइंट निकला. मैं बहुत घबराई. दीदी खजुराहो के सरकारी अस्पताल ले गईं. लेकिन दीदी को लगा कि यहां जज्जा और बच्चा दोनों को खतरा है तो उन्होंने छतरपुर में एक भइया से बात की और फिर वहां जिला अस्पताल में खून चढ़ा. खून चढ़ने के बाद मेरा ब्लड 10 प्वाइंट हो गया था. दीदी की सूझबूझ से आज मेरा बच्चा 2 महीने का बिल्कुल स्वस्थ्य है और मैं भी बिल्कुल स्वस्थ्य हूं.

खुद पोलियो से पीड़ित रहीं

गायत्री तिवारी जिन्हें बचपन से ही पैर में विकलांगता आ गई थी लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं समझा. गांव में रहकर ही 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की. हालांकि, खजुराहो में उनकी शादी हो गई. लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बीएससी की पढ़ाई पूरी की. साल 2007 में राज नगर ब्लॉक में खजुराहो आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता बन गईं और आज उनकी सजगता और सक्रियता के चलते गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को स्वस्थ और पोषक संबंधी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं. हालांकि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गायत्री तिवारी को 8 माह की उम्र में पोलियो हो गया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी थी.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

homemadhya-pradesh

एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की मदद करती हैं आगनवाड़ी गायत्री, दर्जनो की बचाई जान

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *