गुफा में मिला प्राचीन राक्षस! 5000 साल पुराने सुपरबग के सामने मॉडर्न दवाएं फेल

नई दिल्ली: रोमानिया के पहाड़ों में स्थित एक ठंडी और रहस्यमयी गुफा से ऐसी खबर आई है, जो किसी डरावनी फिल्म की शुरुआत जैसी लगती है. वैज्ञानिकों ने पश्चिमी रोमानिया की स्कारिसोआरा बर्फ गुफा (Scarisoara Ice Cave) की गहराई में रिसर्च की. वहां उन्हें 5,000 साल पुराना एक ऐसा बैक्टीरिया मिला है, जिस पर आज की ताकतवर दवाएं भी बेअसर हैं. इसे साइक्रोबैक्टेर (Psychrobacter) नाम दिया गया है. यह प्राचीन ‘सुपरबग’ न केवल जीवित है, बल्कि इसमें आधुनिक एंटीबायोटिक्स से लड़ने की अद्भुत क्षमता भी मौजूद है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज चिकित्सा जगत के लिए जितनी बड़ी उपलब्धि है, मानव जाति के लिए उससे कहीं बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है.

क्या गुफा की गहराई में छिपा है कोई बड़ा खतरा?

रिसर्चर्स ने गुफा के भीतर करीब 25 मीटर लंबा बर्फ का कोर निकाला है. यह बर्फ का टुकड़ा पिछले 13,000 सालों का इतिहास समेटे हुए है. इसमें से मिले साइक्रोबैक्टेर स्ट्रेन SC65A.3 ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. यह बैक्टीरिया इतने सालों तक जमा देने वाली ठंड में भी जिंदा बचा रहा. इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी बुखारेस्ट की डॉक्टर क्रिस्टीना पुर्कारिया के अनुसार, इस बैक्टीरिया में 100 से अधिक ऐसे जीन मिले हैं जो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से जुड़े हैं. यह बात डराने वाली है क्योंकि 5,000 साल पहले इंसानों ने एंटीबायोटिक्स का आविष्कार भी नहीं किया था. ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस बैक्टीरिया ने दवाओं से लड़ने की कला आखिर सीखी कैसे?
टीम ने गुफा के उस हिस्से से 25 मीटर का आइस कोर ड्रिल किया जिसे ग्रेट हॉल के नाम से जाना जाता है. (फोटो क्रेडिट: इटकस सी)

कैसे आधुनिक दवाओं को मात दे रहा है यह सुपरबग?

वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया पर 10 अलग-अलग क्लास की 28 एंटीबायोटिक दवाओं का टेस्ट किया. इनमें से 10 ऐसी दवाएं थीं, जिनका उपयोग आज हम गंभीर इन्फेक्शन्स को ठीक करने के लिए करते हैं. टेस्ट में पता चला कि यह प्राचीन सुपरबग ‘रिफैम्पिसिन’, ‘वैंकोमाइसिन’ और ‘सिप्रोफ्लोक्सासिन’ जैसी दवाओं के खिलाफ पूरी तरह सुरक्षित है. ये वो दवाएं हैं जो टीबी (Tuberculosis) और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के इलाज में रामबाण मानी जाती हैं. इसके अलावा क्लिंडामाइसिन और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं भी इस पर असर नहीं कर पाईं. यह पहली बार है जब साइक्रोबैक्टेर की किसी प्रजाति में इतनी ज्यादा रेजिस्टेंस पावर देखी गई है.

क्या ग्लोबल वार्मिंग ला सकती है नई महामारी?

आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की मार झेल रही है और यही सबसे बड़ी चिंता की वजह है. डॉक्टर पुर्कारिया ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे दुनिया भर की बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे हजारों सालों से दबे हुए सूक्ष्मजीव बाहर आ सकते हैं. अगर ये प्राचीन बैक्टीरिया आधुनिक बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं, तो ये अपने ‘रेजिस्टेंस जीन’ उन्हें ट्रांसफर कर सकते हैं. इससे दुनिया में ऐसे सुपरबग्स फैल सकते हैं, जिनका इलाज करना डॉक्टरों के लिए नामुमकिन हो जाएगा. यह स्थिति भविष्य में एक और बड़ी स्वास्थ्य इमरजेंसी का कारण बन सकती है.

क्या यह खोज मानवता के लिए वरदान साबित होगी?

हैरानी की बात यह है कि यह खतरनाक बैक्टीरिया हमारे काम भी आ सकता है. रिसर्च के दौरान यह देखा गया कि साइक्रोबैक्टेर खुद कुछ ऐसे एंजाइम और कंपाउंड्स पैदा करता है, जो दूसरे सुपरबग्स को मार सकते हैं. इसका मतलब है कि इसकी मदद से हम भविष्य के लिए नई और ज्यादा ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं बना सकते हैं. यह बैक्टीरिया बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि लैब में इस पर काम करते समय बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि यह गलती से भी बाहर न फैल सके.

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