अनंत टेक्नोलॉजी ने पीपीपी पर सरकार को दिया प्रस्ताव: मप्र बनाएगा लो अर्थ ऑ​र्बिट सैटेलाइट, इससे डिजिटल डाटा ट्रांसफर करने की स्पीड बढ़ेगी – Indore News

मध्यप्रदेश अब ड्रोन टेक्नोलॉजी में चल रहे प्रयोग के बाद स्पेस टेक्नोलॉजी में भी तेजी से आगे आएगा। हैदराबाद की कंपनी अनंत टेक्नोलॉजी ने सरकार के साथ मिल कर लियो (लो अर्थ ऑर्बिट) सैटेलाइट बनाने के लिए भी प्रस्ताव दिया है। इससे प्रदेश में डिजिटल डाटा ट

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उन्होंने बताया, प्रदेश में स्पेस व डिफेंस टेक्नोलॉजी के लिए अच्छा माहौल तैयार हो रहा है। आईआईटी में स्पेस टैक्नॉलाजी पर पढ़ाई शुरू हो गई है। कंपनी के पास कम्युनिकेशन सैटेलाइट बनाने का लाइसेंस है। डिजिटल हाई-वे तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए लियो सैटेलाइट बनाने की दिशा में भी प्रदेश सरकार के साथ काम करेंगे।

पीपीपी मॉडल पर इसे तैयार करने के लिए प्रारंभिक चर्चा हुई है। इससे डॉटा कम्युनिकेशन में तेजी आएगी। स्पीड से डाटा ट्रांसफर हो सकेगा। डिजिटल हाई-वे की योजना में भी मदद मिलेगी। इस संबंध में सरकार से चर्चा हुई है, जल्द ही प्रस्ताव दिया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर में कंपनी की भूमिका पर कहा, ब्रह्मोस मिसाइल व ड्रोन में तकनीकी दी थी।

लॉन्ग रेंज एक्सप्लोसिव ड्रोन के माध्यम से ब्लास्ट करने की तकनीक भी कंपनी ने ही तैयार की है। मप्र स्पेस टेक नीति तैयार करके स्पेस टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च में निजी कंपनियों को अवसर देने के प्रयास कर रहा है। केंद्र सरकार भी चाहती है, इस क्षेत्र में निजी कंपनियां आगे आएं, जिससे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में स्पीड मिल सके। लियो सैटेलाइट इसका एक माध्यम बनेगा। क्योंकि इससे दूर दराज के क्षेत्रों के लिए डाटा ट्रांसफर में भी आसानी हो सकेगी।

ईवी मैन्युफैक्चरिंग ईको सिस्टम का भी प्रस्ताव टेक कॉन्क्लेव में डिजिटल हाई-वे, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, आईटी पार्क के साथ ही ईवी मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम के क्षेत्र में प्रस्ताव मिले हैं। थॉमसन सेमीकंडक्टर के श्रीनिवासन अनंत ने 5 हजार करोड़ के निवेश को लेकर चर्चा की है। पीथमपुर को यह निवेश मिल सकता है।

क्या होते हैं लियो सैटेलाइट

सैटेलाइट्स की तीन कैटेगरी होती हैं। लो-अर्थ ऑर्बिट, मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट और लियो सैटेलाइट। लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग कम्युनिकेशन की स्पीड तेज करने के लिए होता है। ये सैटेलाइट जमीन की सतह से 200 से 2000 किमी की ऊंचाई पर होते हैं। ये तेजी से मूवमेंट करते हैं। इन्हें लांच करने में एनर्जी और कम पॉवर के एम्पलीफायर का उपयोग होता है।

इनका फायदा इनके उपयोग से ई-मेल, वीसी, पेजिंग जैसे डाटा कम्युनिकेशन आसान होता है। प्रदेश में इनके बनने से बहुत सी सुविधाएं बेहतर होंगी। डिजिटलाइजेशन सर्विसेस को गति मिल सकेगी। इसका लाभ निजी क्षेत्रों को भी होगा। इनसे नई टेक्नोलॉजी कॉन्सेप्ट, टेस्टिंग व रिसर्च पर आसान सुविधा मिल सकेगी।

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