अमृता ने पारंपरिक घी से बनाया हेल्दी ब्रांड ‘ऋषामृत’,जानें कैसे की शुरुआत

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Amrita Soman Success Story: मुंबई की अमृता सोमन ने 2018 में ऋषामृत की स्थापना की, जो शुद्धता और विश्वास का प्रतीक है. यहां देसी गिर गाय के शुद्ध घी, ड्राई फ्रूट्स लड्डू, सत्तू लड्डू और रागी-ओट्स लड्डू के साथ हेल्दी स्प्रेड्स तैयार किए जाते हैं. नया आउटलेट लाइव घी कॉन्सेप्ट के साथ है, जहाँ ग्राहक बिलोना विधि से बनने वाला घी बनते देख सकते हैं. बिलोना प्रोसेस में पूरे दूध से मक्खन निकाला जाता है और 25-30 लीटर दूध से मात्र 1 किलो घी बनता है, जो स्वाद, सेहत और पारंपरिक दानेदार बनावट में श्रेष्ठ है.

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मुंबई. शुद्ध खान-पान और परंपराओं को सहेजने की कला आज के समय में एक ऐसी जरूरत बन गई है, जो तेजी से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है. इसी दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए मुंबई की अमृता सोमन ने साल 2018 में ऋषामृत की शुरुआत की. ऋषामृत केवल एक ब्रांड नहीं है, बल्कि यह शुद्धता और विश्वास का वह संगम है, जिसे अमृता ने बड़ी ही शिद्दत से सींचा है. यहां घी के अलावा ड्राई फ्रूट्स लड्डू, सत्तू लड्डू और रागी-ओट्स जैसे पौष्टिक लड्डू के साथ-साथ हेल्दी स्प्रेड्स भी तैयार किए जाते हैं.

इन सभी उत्पादों की खास बात यह है कि इनमें केवल देसी गिर गाय के शुद्ध घी का ही इस्तेमाल होता है, जो सेहत और स्वाद दोनों का ख्याल रखता है. अमृता सोमन के इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका नया आउटलेट है, जहाँ लाइव घी का कॉन्सेप्ट है. इस पहल के पीछे उनका मुख्य मोटिव ग्राहकों और ब्रांड के बीच की दूरी को खत्म करना है.

25 से 30 लीटर दूध से सिर्फ़ 1 किलो घी बनता है

अमृता सोमन ने लोकल 18 को बताया कि वे चाहती हैं कि ग्राहक और ब्रांड के बीच कोई पर्दा न रहे और पूरी ट्रांसपेरेंसी बनी रहे. यहाँ लोग अपनी आंखों के सामने घी को बनते देख सकते हैं, जिससे उन्हें यह तसल्ली मिलती है कि उनके घर में इस्तेमाल होने वाला घी पूरी तरह शुद्ध है. यहां पर घी बिलोना विधि से बनाया जाता है. 25 से 30 लीटर दूध से सिर्फ़ 1 किलो घी बनता है. यह बिल्कुल वैसा ही दानेदार घी होता है, जैसा कभी हमारी दादी-नानी घर पर बड़े प्यार से बनाया करती थीं. आज के मिलावटी दौर में यह पारदर्शिता लोगों का दिल जीत रही है और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ रही है.

क्या है घी बनाने की पारंपरिक बिलोना विधि?

घी बनाने का एक प्रॉसेस, जिसे बिलोना प्रोसेस कहा जाता है, यह एक प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति है, जो घी के औषधीय गुणों को बरकरार रखती है. इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें घी बनाने के लिए सीधे क्रीम का नहीं, बल्कि पूरे दूध का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले दूध को उबालकर उसका दही जमाया जाता है, और फिर उस दही को लकड़ी की राई मथनी से मथकर मक्खन निकाला जाता है. लगभग 25 से 30 लीटर दूध के मंथन से मात्र 1 किलो घी प्राप्त होता है. धीमी आंच पर तैयार होने वाला यह घी न केवल बेहतरीन सुगंध और दानेदार बनावट से भरपूर होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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