Sensex Outlook: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के बढ़ते हमलों के बीच शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. बुधवार को लगातार चौथे दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी रही. हालांकि, इस बीच, ब्रोकरेज हाउस Morgan Stanley की एक रिपोर्ट ने निवेशकों को चौंका दिया है. इसका कहना है कि सेंसेक्स इस साल दिसंबर तक 107000 के लेवल तक पहुंच सकता है.
सेंसेक्स सोने के मुकाबले ‘सस्ता’
मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में सेंसेक्स को ‘सोने के नजरिए से सस्ता’ बताया है. इसे इस तरह से समझ सकते हैं- कल सेंसेक्स में 1122 अंकों की गिरावट आई, जबकि जंग के इस माहौल में सोने की कीमतें बढ़ी हैं. यानी कि सोने के मुकाबले सेंसेक्स की परचेजिंग पावर या क्रय शक्ति कम हुई है. जब सेंसेक्स-गोल्ड रेशियो कम होता है, तब यह सोने के मुकाबले स्टॉक्स के अंडरवैल्यूड होने का एक संकेत देता है. ऐसे में निवेशकों को लगता है कि यहां पर निवेश भविष्य में अच्छा रिटर्न देगा.
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
ब्रोकरेज का कहना है कि मार्केट का स्ट्रेस बेहतर मैक्रो फंडामेंटल्स और पॉलिसी के अनुकूल माहौल के साथ मेल नहीं खाता है. यानी कि एक तरफ देश की आर्थिक स्थिति मजबूत है, लेकिन बावजूद इसके शेयर बाजार नीचे गिर रहा है. अपनी रिपोर्ट में मॉर्गन स्टेनली के रिधम देसाई ने मौजूदा दौर को ‘मार्केट और मैक्रो के बीच दरार’ बताते हुए कहा कि यह डिस्कनेक्ट हाई-क्वालिटी इंडियन इक्विटीज में खरीदारी का मौका बना रहा है.
यानी कि देश की इकोनॉमी हकीकत में मजबूत है. युद्ध की वजह से शेयरों में गिरावट अस्थायी है. जंग के इस माहौल में बिकवाली के दबाव में आकर जब अच्छी कंपनियों के भी शेयर 10-15 परसेंट तक टूट जाते हैं, तो समझदार निवेशक इन्हें ‘डिस्काउंट’ के तौर पर देखते हैं. घबराकर शेयरों को बेचने के बजाय अच्छी कंपनियों के शेयरों को जमा करने का यही सही मौका है, जो बाद में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. ऐसे में बुल-केस सिनेरियो में बेंचमार्क इंडेक्स के दिसंबर 2026 तक 107,000 तक चढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है.
सेंसेक्स में 33 परसेंट का उछाल
रिपोर्ट में कहा गया है, “हमें लगता है कि इसी झटके की वजह से भारतीय स्टॉक्स के लिए मार्केट में खराब स्थिति पैदा हो रही है.” रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह घरेलू फंडामेंटल्स में किसी गिरावट के बजाय पैसिव आउटफ्लो, हेज फंड पोजिशनिंग और ग्लोबल रिस्क-ऑफ जैसे फैक्टर्स की वजह से हुआ है.
हाल के खराब परफॉर्मेंस के बावजूद मॉर्गन स्टेनली भारतीय इक्विटी के लिए मीडियम-टर्म ट्रैजेक्टरी को लेकर कंस्ट्रक्टिव बना हुआ है. इसने दिसंबर 2026 तक BSE सेंसेक्स का बेस-केस टारगेट 95,000 तय किया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 18 परसेंट की बढ़त होगी और बुल-केस टारगेट 107,000 है, जिसका मतलब है कि 33 परसेंट का उछाल आ सकता है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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