रात में चॉकलेट खाने की ज्यादा इच्छा क्यों होती है? अमेरिकी डॉक्टर ने बताई वजह, जानकर चौंक जाएंगे

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Science Behind Chocolate Cravings: कई बार आपने महसूस किया होगा कि रात के वक्त चॉकलेट या मीठा खाने की इच्छा ज्यादा होती है. अमेरिका के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार देर रात चॉकलेट या मीठा खाने की इच्छा कमजोर इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और नींद की कमी का नतीजा होती है. सर्केडियन रिदम, हार्मोन और दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम में बदलाव के कारण रात में क्रेविंग तेज हो जाती है.

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एक्सपर्ट के मुताबिक चॉकलेट खाने की क्रेविंग सर्केडियन रिदम के कारण होती है.

Night-Time Chocolate Cravings Reason: चॉकलेट खाना अधिकतर लोगों को पसंद होता है. अक्सर लोगों को रात में चॉकलेट खाने की इच्छा होती है, जिसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. लोग देर रात लगने वाली चॉकलेट या मीठे खाने की क्रेविंग के लिए खुद को दोषी मान लेते हैं और इसे कमजोर इच्छाशक्ति का नतीजा समझते हैं. हालांकि अमेरिका में प्रैक्टिस कर रहे और हार्वर्ड से पढ़ाई कर चुके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार देर रात खाने की इच्छा का कारण हमारी आदतें नहीं, बल्कि शरीर की बायोलॉजिकल प्रोसेस होती है. शरीर और दिमाग में दिन ढलने के बाद ऐसे बदलाव होते हैं, जो खाने को रोकना मुश्किल बना देते हैं. यह पूरी तरह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक शाम होते ही शरीर की सर्कैडियन रिदम यानी इंटरनल क्लॉक बदलने लगती है. यह घड़ी नींद, हार्मोन और भूख को कंट्रोल करती है. जैसे-जैसे रात नजदीक आती है, वैसे-वैसे सेल्फ कंट्रोल करने वाला दिमाग का हिस्सा कमजोर पड़ने लगता है और रिवॉर्ड सिस्टम ज्यादा एक्टिव हो जाता है. इसका मतलब है कि दिमाग तुरंत खुशी देने वाली चीजों की ओर ज्यादा आकर्षित होता है. यही वजह है कि रात में सलाद या सब्जियों की बजाय चॉकलेट, मिठाई या हाई-कैलोरी स्नैक्स खाने का मन करता है. नींद की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है.

कई रिसर्च बताती हैं कि कम सोने से शरीर में घ्रेलिन हार्मोन 20-30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जबकि लेप्टिन हार्मोन कम हो जाता है. इस हार्मोनल असंतुलन की वजह से व्यक्ति को ज्यादा भूख लगती है और खाने के बाद भी संतुष्टि महसूस नहीं होती. अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो शाम और रात के समय क्रेविंग पर काबू पाना और मुश्किल हो जाता है. ब्रेन स्कैन स्टडीज से भी इस बात की पुष्टि होती है कि देर रात खाने की इच्छा क्यों बेकाबू लगती है. जब नींद पूरी नहीं होती, तो दिमाग के रिवॉर्ड सेंटर्स हाई-कैलोरी फूड को देखकर 25-30 प्रतिशत ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. नतीजा यह होता है कि क्रेविंग तेज हो जाती है और ना कहने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है.

देर रात खाने की आदत से सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. रिसर्च के अनुसार रात में खाने वाले लोग अगली सुबह ज्यादा भूख महसूस करते हैं और उनका फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ा हुआ हो सकता है. इसके अलावा देर से खाना गहरी नींद को प्रभावित करता है, जिससे हार्मोन और भूख का संतुलन और बिगड़ जाता है. लंबे समय तक यह पैटर्न बना रहने से वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल इस समस्या को और बढ़ा देता है. रात में फोन स्क्रॉल करने या वीडियो देखने से दिमाग ज्यादा एक्टिव रहता है और नींद आने में देरी होती है. साथ ही स्क्रीन पर दिखने वाले खाने के विज्ञापन और वीडियो दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को लगातार उत्तेजित करते रहते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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