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मलप्पुरम जिले में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस से शाजी समेत एक महीने में छह मौतें हुईं. केएमसीएच में इलाज जारी है, संक्रमण का स्रोत अज्ञात है, निगरानी और जागरूकता बढ़ी है.
केरल में दिमाग खाने वाले अमीबा ने ले ली शख्स की जान. (Canva)रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि शाजी को लिवर संबंधी बीमारियां थीं और इस दौरान उन्हें दी जा रही दवाओं का उन पर कोई असर नहीं हो रहा था.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार रात उनकी मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके संक्रमण के स्रोत का अभी पता नहीं चल पाया है. इसी सप्ताह मलप्पुरम के वंदूर की एक महिला ने अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के कारण केएमसीएच में दम तोड़ दिया था. इस बीच, बुधवार को 10 वर्षीय लड़की और एक महिला की जांच में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है.
10 मरीजों का चल रहा इलाज
अभियान चला किया जा रहा जागरूक
अमीबा के स्रोत का पता न लगा पाने की वजह से राज्य में, खासकर उत्तरी क्षेत्र में, संक्रमण को नियंत्रित करने के स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रयासों में बाधा आ रही है, जहां पिछले एक महीने में तीन महीने के एक शिशु और नौ साल की एक बच्ची समेत छह की मौत हुई है. लगातार हो रही इन मौतों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बीमारी के बारे में निगरानी और जन जागरूकता अभियान तेज करने के लिए प्रेरित किया है, जो आमतौर पर जलजनित अमीबा के कारण होती है.
अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस एक गंभीर मस्तिष्क संक्रमण है जो एक मुक्त-जीवित अमीबा, आमतौर पर ‘नेगलेरिया फाउलेरी,’ के कारण होता है. स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह जीवाणु दूषित मीठे पानी में तैरने या गोता लगाने पर नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. फिर यह मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, जिससे सूजन और टीशू को नुकसान पहुंचता है.यह बीमारी संक्रामक नहीं है और दूषित पानी पीने से नहीं फैलती. कुछ विशेषज्ञों ने मामलों में हालिया वृद्धि को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा है.