आमडाढ़ी ढाला का पेड़ा.. बसंत बाजार का कलाकंद, 50 साल पुराना बेहद गजब स्वाद

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Chapra Famous Peda: छपरा के आमडाढ़ी ढाला का पेड़ा और बसंत बाजार का कलाकंद शुद्धता व स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्हें दुबई तक लोग ले जाते हैं. 50 साल पुरानी दुकानें आज भी लोकप्रिय हैं.

छपरा में फास्ट फूड ही नहीं, बल्कि शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाइयां भी मिलती हैं. शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में भी कई छोटी-छोटी दुकानें हैं, जो अपनी मिठाइयों की शुद्धता के लिए मशहूर हैं. जिले के आमडाढ़ी ढाला के पास बेहद स्वादिष्ट और शुद्ध पेड़ा मिलता है, जबकि बसंत बाजार का कलाकंद अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इन दुकानों की मिठाइयां लोग विदेश तक खरीदकर ले जाते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों से दूध मंगाकर कोयले की आग पर दूध को अच्छी तरह पकाया जाता है और उससे पेड़ा व कलाकंद तैयार किया जाता है. इनमें चीनी की मात्रा काफी कम रखी जाती है. किशमिश, इलायची सहित कई अन्य सामग्री डालकर खास मिठाइयां बनाई जाती हैं. इन्हें खाने के लिए जिले के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं.
आमडाढ़ी का पेड़ा सिवान, गोपालगंज और उत्तर प्रदेश तक अपनी पहचान बना चुका है. यहां केवल यही मिठाई मिलती है. यहां एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों दुकानें मौजूद हैं. एक दुकान पर प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक दूध से पेड़ा तैयार किया जाता है, जो शाम तक पूरी तरह बिक जाता है.

उत्तर प्रदेश में भी काफी मांग
लोकल 18 से कमल देव प्रसाद ने बताया कि यहां पर ताजा और शुद्ध पेड़ा मिलता है. जिसकी वजह से दूर-दूर से लोग यहां की मिठाई खाने के लिए आते हैं. छपरा, सीवान, गोपालगंज, महाराजगंज और उत्तर प्रदेश के लोग भी आते हैं. उन्होंने बताया कि आम दाढ़ी ढाला का पेड़ा काफी मशहूर है. जो लोग जानते हैं वह खरीद कर अपने परिवार और संबंधियों के लिए लेकर जाते हैं. यहां 360 रुपए किलो पेड़ा मिलता है. जबकि एक पीस ₹10 में बेचा जाता है.

50 साल पुरानी दुकान
दुकानदार बबलू प्रसाद ने बताया कि मेरे यहां ग्रामीण क्षेत्र से दूध लाने के बाद कोयले की आग पर जलाकर खोआ निकल जाता है. जिसका कलाकंद बनाया जाता है. इसमें कोई मिलावट नहीं की जाती है. पहले मेरे पिताजी इस दुकान को चलाया करते थे, अब हम लोग दूसरे पीढ़ी के रूप में इस दुकान को संभाल रहे हैं. 50 वर्ष से भी अधिक पुरानी यह दुकान है. इसके बावजूद भी ग्राहकों की यहां की मिठाई काफी पसंद है. इसका मुख्य कारण यही है कि पूरे शुद्धता के साथ मिठाई आज भी बनाई जाती है. साफ सफाई पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है. यहां की मिठाई दुबई रहने वाले लोग भी खरीदकर ले जाते हैं. कलाकंद ₹400 किलो बेचा जाता है. जबकि 100 ग्राम ₹40 में मिलता है. चीनी इसमें कम डाला जाता है. इलायची, किशमिश, काजू सहित कई मटेरियल डाल कर इस मिठाई को तैयार किया जाता है.

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Mohd Majid

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