शुद्ध दूध और देसी स्वाद का कमाल! जलधारी के पेड़े बन चुके हैं मशहूर ब्रांड, देश-विदेश में हो रही सप्लाई

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Sikar Famous Jaldhari ke Pede: सीकर के नंदलाल जलधारी ने साल 1982 में घर से पेड़े बनाकर बेचने की शुरुआत की थी. शुद्ध दूध, बिना केमिकल और ट्रेडिशनल स्वाद के दम पर उनका छोटा सा काम आज एक ब्रांड बन चुका है. माउथ पब्लिसिटी से लोकप्रिय हुए जलधारी के पेड़े आज देश-विदेश तक सप्लाई हो रहे हैं. गुणवत्ता और भरोसे ने उनकी मिठाई को सीकर की पहचान बना दिया है.

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Jaldhari ke Pede: सीकर के नंदलाल जलधारी की कहानी मेहनत और स्वाद की मिसाल है. साल 1982 में उन्होंने अपने घर से ही पेड़े बनाकर बेचने की शुरुआत की थी. उस समय यह सिर्फ एक छोटा सा काम था, लेकिन क्वालिटी और टेस्ट ने लोगों का भरोसा जीत लिया. आज जलधारी के पेड़े ब्रांड बन चुके हैं. इनकी यह मिठाई इतनी प्रसिद्ध है कि लोग दूर-दूर से इसे खाने के लिए आते हैं. लोग खास तौर पर नंदलाल जलधारी के पेड़ों का प्योर टेस्ट पसंद करते है. यही भरोसा उनके ब्रांड की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ बना. स्वाद के मामले में नंदलाल जलधारी का नाम सीकर में ब्रांड बन चुका है.

नंदलाल जलधारी ने बताया कि साल 1986 में उन्होंने सीकर शहर में अपनी दुकान स्थापित की थी. उनके बनाए पेड़े लोगों को खूब पसंद आए. पहले जहां ग्राहक आस-पास के इलाकों से आते थे, आज सभी उनके पास आते हैं. उन्होंने बताया कि उनके बनाए पेड़े दूसरे राज्यों में भी सप्लाई किए जाते हैं. यह सब बिना किसी बड़े एडवरटाइजमेंट के हुआ, सिर्फ माउथ पब्लिसिटी से हुआ है. लोगों को उनका ट्रेडिशनल टेस्ट पसंद आया. धीरे-धीरे उनकी दुकान सीकर की पहचान बन गई और पेड़े एक ब्रांड की तरह बिकने लगे.

देश से विदेश तक पहुंच चुका है स्वाद

नंदलाल जलधारी ने बताया कि उनके बनाए पेड़े सिर्फ सीकर या भारत तक सीमित नहीं हैं. उनके पेड़े अमेरिका, इंग्लैंड, कुवैत, दुबई, कनाडा सहित दस से ज्यादा देशों के प्रवासियों के पास जाते हैं. विदेशों में रहने वाले भारतीय खास तौर पर इन पेड़ों को बहुत पसंद करते हैं. वहां भी लोग होममेड टेस्ट और शुद्धता को प्राथमिकता देते हैं. नंदलाल जलधारी के पेड़े इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं. यही वजह है कि इंटरनेशनल मार्केट में भी उनकी डिमांड लगातार बढ़ रही है.

दूध के लिए घर में ही पाल रखा है गाय

नंदलाल जलधारी बताते हैं कि उनके पेड़ों में किसी भी तरह का केमिकल या आर्टिफिशियल कलर इस्तेमाल नहीं किया जाता. वे अपने घर में ही गायों को पालते हैं और गौसेवा भी करते हैं. उन्हीं गायों के शुद्ध दूध से पेड़े बनाए जाते हैं. इसके अलावा इलायची, केसर और पिस्ता जैसे नेचुरल इंग्रेडिएंट्स का ही प्रयोग होता है. चीनी भी बहुत कम मात्रा में डाली जाती है. उनका साफ कहना है कि क्वालिटी और ब्रांड वैल्यू से कभी कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जाएगा.

बड़ी इंडस्ट्री के रूप में विकसित करने का है सपना

नंदलाल जलधारी का सपना है कि वे अपनी इस दुकान को आगे चलकर एक बड़ी इंडस्ट्री के रूप में विकसित करना चाहते हैं. उनका मानना है कि इससे लोकल लोगों को रोजगार मिलेगा और सीकर की पहचान और मजबूत होगी. अभी भी उनकी दुकान पर स्थानीय कारीगर ही काम करते हैं. वे चाहते हैं कि ट्रेडिशनल स्वाद को बनाए रखते हुए मॉडर्न सेटअप तैयार किया जाए.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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शुद्ध दूध और देसी स्वाद का कमाल! जलधारी के पेड़े बन चुके हैं मशहूर ब्रांड

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