देसी दिमाग का कमाल… 22 साल की उम्र में कूट डाले 2 अरब डॉलर

आज भारतीय लोग हर क्षेत्र में नया मुकाम हासिल कर रहे हैं. सिलिकॉन वैली में रहने वाले तीन देसी दोस्तों ने भी ऐसा ही कमाल कर दिखाया है. क्या आपने कभी सोचा था कि हाई स्कूल की डिबेट टीम के तीन लड़के, जो रात-रात भर बहस करते थे कि काम का भविष्य कैसा होगा? एक दिन दुनिया के सबसे कम उम्र के अरबपति बन जाएंगे और अमेरिका के मार्क जकरबर्ग को भी अपने देसी दिमाग से धूल चटा देंगे.

ये कोई बॉलीवुड स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि सिलिकॉन वैली के दो देसी हीरो आदर्श हीरेमठ और सूर्या मिधा की सच्ची कहानी है. मात्र 22 साल की उम्र में इन दोनों ने अपने तीसरे दोस्त ब्रेंडन फूडी के साथ मिलकर दुनिया के सबसे कम उम्र के अरबपतियों में शामिल होने का नया इतिहास रच दिया. उनकी कंपनी मर्कोर का वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर पहुंच चुका है, जिससे तीनों की नेटवर्थ 2.2 अरब डॉलर से ऊपर हो गई.

एक लाख डॉलर से किया मर्कोर लॉन्च

मर्कोर कंपनी में ब्रेंडन सीईओ, हीरेमठ चीफ टेक्निकल ऑफिसर (सीटीओ) और मिधा (चेयरमैन) हैं. हीरेमठ के माता-पिता कोलकाता के रहने वाले हैं, जबकि मिधा का परिवार नई दिल्ली में रहा करता था. इन तीनों की कहानी बेलार्माइन कॉलेज प्रिपरेटरी, सैन होज़े के एक ऑल-बॉयज जेसुइट स्कूल में शुरू हुई, जहां वे राष्ट्रीय बहस प्रतियोगिताओं की तैयारियों के दौरान एक-दूसरे से जुड़े. वे रात-रात भर बहस करते थे कि काम का भविष्य क्या होगा.

हाई स्कूल के बाद ये तीनों आगे की पढ़ाई के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों में चल गए. ब्रेंडन फूडी अर्थशास्त्र के लिए जॉर्जटाउन गए, हीरेमठ कंप्यूटर साइंस के लिए हार्वर्ड गए और मिधा विदेशी सेवा के लिए जॉर्जटाउन गए. हालांकि फिर आगे चलकर सिलिकॉन वैली की एक स्टार्टअप ने तीनों को फिर से साथ ला दिया. साल 2023 की शुरुआत में, कॉलेज के दूसरे साल में ही उन्होंने थिएल फेलोशिप से मिले 100,000 डॉलर से मर्कोर लॉन्च किया.

कंपनी की सालाना कमाई 50 करोड़ डॉलर

इनका शुरुआती आइडिया था कि भारत के ढेर सारे कोडर्स को अमेरिकी स्टार्टअप्स से जोड़ना, लेकिन चैटजीपीटी जैसे एआई मॉडल्स के लिए ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ की जरूरत ने सब बदल दिया. मर्कोर एआई पर चलने वाला प्लेटफॉर्म है, जो भर्ती की प्रक्रिया को ऑटोमेटिक करता है यानी कंपनियों को सही लोगों से जोड़ता है. इस प्लेटफॉर्म पर अब डॉक्टर, वकील, इंजीनियर और फाइनेंस एक्सपर्ट जैसे दुनिया भर के 30,000 से ज्यादा विशेषज्ञ हैं. ये लोग डेटा तैयार करने, एआई मॉडल को ट्रेन करने और ऐसे फैसले लेने में मदद करते हैं जो मशीन खुद नहीं कर सकती.

कंपनी की फंडिंग की रफ्तार रॉकेट जैसी है. सितंबर 2024 में 32 मिलियन डॉलर की सीरीज ए ने वैल्यूएशन 250 मिलियन डॉलर किया. फरवरी 2025 में 100 मिलियन की सीरीज बी ने इसे 2 बिलियन तक पहुंचाया और इस हफ्ते 350 मिलियन डॉलर की सीरीज सी ने 10 बिलियन का आंकड़ा छू लिया. मध्य-2024 तक कंपनी का सालाना रेवेन्यू 500 मिलियन डॉलर था, जो कुछ महीने पहले सिर्फ 100 मिलियन था.

मर्कोर बनाएगा दुनिया का जॉब हब

मेटा कंपनी ने जब मर्कोर के विरोधी ‘स्केल एआई’ को 14.3 डालर बिलियन में खरीदा, तो OpenAI, गूगल डीपमाइंड और बाकी बड़े टेक दिग्गज अब मर्कोर की ओर मुड़े गए, जिससे मर्कोर की ग्रोथ और तेज हो गई. आदर्श हीरेमठ, जो हार्वर्ड में कंप्यूटर साइंस छोड़कर आए थे, कहते हैं कि 2035 तक हम हर इंसान को हर जॉब से सहज तरीके से जोड़ देंगे, एक तरह का ग्लोबल जॉब मार्केट.

इनकी 30 सदस्यीय टीम की औसत उम्र भी 22 साल है. भारत के हजारों कोडर्स, डॉक्टर्स और रिसर्चर्स आज मर्कोर के जरिए ओपनएआई जैसे दिग्गजों के लिए काम कर रहे हैं. जकरबर्ग को 23 साल की उम्र में 1 बिलियन डॉलर मिले थे, जबकि मर्कोर की तिकड़ी ने 22 साल की उम्र में 2.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा कमा लिए. यह कमाल उन्होंनें सिर्फ दो साल में कर दिखाया. यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि देसी टैलेंट को ग्लोबल स्टेज पर लाने की मिसाल है. यह देसी दिमाग अभी रुका नहीं है, आने वाले सालों में और बड़े कमाल दिखाएगा.

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