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Success Story : बिहार के दो युवाओं ने छठ पूजा पर मिलने वाले ठेकुआ प्रसाद का बिजनेस शुरू किया तो उन्हें खुद कोई उम्मीद नहीं थी कि एक दिन यह बिजनेस 1 करोड़ रुपये का हो जाएगा.
नई दिल्ली. वैसे तो बिहार का लिट्टी-चोखा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन एक और डिश है जिसे सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह डिश खासकर छठ जैसे त्योहारों पर बनाई जाती है और इसका नाम है ठेकुआ. आपको नाम सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसका स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना लेता है. इसी स्वाद और देसी टच को बंगाल के दो टीनेज लड़कों ने बिजनेस बना दिया. उन्होंने शुरुआत तो बस त्योहारों पर प्रसाद बांटने के लिए की थी, लेकिन उनके प्रोडक्ट की डिमांड ऐसी बढ़ी कि आज यह एक करोड़ से ज्यादा का कारोबार बन चुका है.
पश्चिम बंगाल के रहने वाले जयंत और कैलाश ने इस बिजनेस को अपने घर की टूटी-फूटी रसोई से शुरू किया था. उनका शुरुआती निवेश भी महज 10 हजार रुपये था. पहले तो उन्हें सिर्फ लोकल मार्केट से ही इसके ऑर्डर आते थे और काफी कम बिक्री थी. लेकिन, उनकी मेहनत और स्वाद ने जब रंग दिखाया तो दूर-दूर से भी ऑर्डर आने लगे. पहले अपने कस्बे में फेमस हुआ उनका प्रोडक्ट आज पूरे बिहार में खरीदा और बेचा जाता है. उनके ठेकुआ को अब ऑनलाइन ऑर्डर देकर भी मंगाया जा सकता है.
कैसे आया बिजनेस का आइडिया
ठेकुआ बिजनेस का यह आइडिया सबसे पहले 17 साल के जयंत के दिमाग में तब आया, जब वह सड़क किनारे एक दुकान से ठेकुआ खरीदकर खाने के बाद बीमार पड़ गया. जयंत ने सोचा कि क्यों न इसे शुद्ध रूप से बनाकर बेचा जाए ताकि और कोई बीमार न पड़े. इसी विचार के साथ जयंत ने अपना बिजनेस शुरू किया, लेकिन उन्हें एक पार्टनर की तलाश थी. जयंत ने अपने एक दोस्त कैलाश से पार्टनर बनने की बात कही, जो पहले रेलवे स्टेशनों पर पानी की बोतलें बेचा करता था. जब यह जोड़ी साथ मिली तो कमाल हो गया और उन्होंने एक छोटी सी सोच को करोड़ रुपये के बिजनेस में बदल दिया.
ब्रांड का नाम बड़ा आकर्षक
कैलाश और जयंत ने अपने ब्रांड का नाम शुद्ध स्वाद (Shuddh Swad Thekua) रखा. इसके पीछे की मंशा थी कि लोगों को शुद्ध ठेकुआ उपलब्ध कराया जाए. वैसे तो ठेकुआ बिहार में सिर्फ छठ पूजा के मौके पर ही बनता है, लेकिन इन दोनों लड़कों ने इसे ब्रांड बनाकर सालभर लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया. खासकर उन ग्राहकों के लिए भी, जिनका बिहार से कोई ताल्लुक नहीं रहता है.
2 महीने तक कोई ऑर्डर नहीं
कैलाश और जयंत ने अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए काफी मेहनत की. दोनों दिन के 10 घंटे तक काम करते और अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाने पर खास जोर देते. शुरुआती 2 महीने तक तो दोनों को एक भी ऑर्डर नहीं मिला और लोग उन्हें गलत धंधे में जाने को लेकर ताने भी देने लगे. बावजूद इसके दोनों ने हार नहीं मानी और लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व लोकल मार्केट में अपनी ब्रांडिंग करते रहे. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उनके पास करीब 3 लाख कस्टमर हैं, जबकि बिजनेस बढ़कर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें
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