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- Amalki Ekadashi 2026, Significance Of Ekadashi Vrat, Vishnu Puja Vidhi, Surya Puja, Rangbhari Ekadashi, Holi 2026
2 घंटे पहले
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शुक्रवार, 27 फरवरी को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे रंगभरी और आमलकी एकादशी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही आंवले के पेड़ की और मां अन्नपूर्णा की पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, होली यानी फाल्गुन पूर्णिमा (2 मार्च) से पहले आने वाली इस एकादशी पर भगवान को प्राकृतिक रंग-गुलाल चढ़ाकर पूजा करने का विशेष महत्व है। इस बार ये एकादशी शुक्रवार को से होने से इस दिन महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की भी विशेष पूजा जरूर करें। जानिए आमलकी एकादशी पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
- आमलकी एकादशी पर व्रत और पूजा-पाठ करने के साथ ही किसी मंदिर में या किसी सार्वजनिक जगह पर आंवले का पौधा लगाएं। घर के आसपास जहां आंवले का पेड़ है, वहां जाकर आंवले की विधिवत पूजा करें।
- मान्यता है कि आंवले की पूजा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आंवले का इस्तेमाल लक्ष्मी पूजा में खासतौर पर किया जाता है। पानी में आंवले का रस मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। आंवले का रस हमारी त्वचा की चमक बढ़ाता है।
- आयुर्वेद में आंवले का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। इसके नियमित सेवन से कई बीमारियों की रोकथाम हो जाती है। आंवले का या इसके रस का नियमित सेवन करने से पेट और पाचन से जुड़ी बीमारियां जल्दी ठीक हो सकती हैं।
- इस दिन मां अन्नपूर्णा की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। मां अन्नपूर्णा की कृपा से घर-परिवार में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती है। साथ ही, इस दिन संकल्प लेना चाहिए कि कभी भी अन्न का अनादर नहीं करेंगे। जूठा भोजन नहीं छोड़ेंगे। मान्यता है कि अन्न का सम्मान करने से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।
- शुक्रवार को सुबह जल्दी उठें और नहाने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे से जल भरें। जल में कुमकुम, चावल डालें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को चढ़ाएं।
- एकादशी पर घर के मंदिर में सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश पूजा के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करने का और व्रत करने का संकल्प लें। दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का अभिषेक करें। नए वस्त्र, हार-फूल से भगवान का श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते रहें।
- जो लोग एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें दिनभर निराहार रहना चाहिए। अगर दिनभर भूखे रहना मुश्किल हो तो दूध, फल और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। व्रत करने वाले व्यक्ति को द्वादशी तिथि यानी 28 फरवरी की सुबह भी विष्णु पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और फिर खुद खाना खाएं, इस तरह ये व्रत पूरा होता है।
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