ईरान में इस समय जबरदस्त प्रदर्शनों और 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद देश के प्रमुख और सर्वोच्च धर्म गुरु अयातुल्लाह अली खामनेई दबाव में हैं. हालांकि उनका और उनके परिवार का शिकंजा देश पर कसा हुआ है. लेकिन वहीं दूसरी ओर अली खामनेई के तकरीबन सभी भाई, बहन, भतीजे और भांजी उनका विरोध करते रहे हैं. उनसे इस्तीफा मांग चुके हैं. इसके जवाब में खामनेई ने अपने भाई बहनों और उनके परिवारों को दबाने, प्रताड़ित करने और जेल में भेजने के काम लगातार किये हैं.
जानकारी के अनुसार ईरान के सर्वोच्च लीडर अयातुल्ला अली खामनेई कुल मिलाकर 8 भाई बहन हैं. उनके भतीजे देश के बाहर रहते हैं. वहां से अक्सर अपने चाचा के शासन का विरोध करते रहते हैं. खामनेई के बड़े भाई हादी खामेनेई एक धर्मगुरु और रिफॉर्मिस्ट विचारधारा के नेता रहे हैं. वह उस इस्लामी आंदोलन में शामिल थे, जो ईरान से शाह पहलवी को सत्ता से हटाने के लिए किया गया लेकिन उसके बाद भाई के गद्दी पर बैठने के बाद वह उनके प्रबल विरोधी हो गए. वह अपना अखबार भी निकालते हैं.
बड़े भाई पर हमले कराए, अखबार बंद करा दिया
1990 और 1999 में हादी खामेनेई ने रिफॉर्मिस्ट प्रेस और आंदोलन का खुलकर समर्थन किया. इसके कारण उनके अख़बार हयात ए नो (Hayat-e-No) को बंद कर दिया गया. उन पर जानलेवा हमले भी हुए .उन्होंने ईरान में प्रेस की आज़ादी, चुनाव सुधार और राजनीतिक उदारीकरण की वकालत की. 1997-1999 के बीच जब मोहम्मद खातमी राष्ट्रपति बने, तब हादी खामनेई उनके समर्थक बनकर सामने आए. हालांकि इसके बाद शासन समर्थक कट्टरपंथियों ने उन पर कई बार हमले करवाए. खामेनेई सत्ता तंत्र ने उन्हें हाशिए पर डाल दिया. वह अब भी शासन विरोधी माने जाते हैं.
ईरानी इस्लामिक क्रांति के दौरान अपने बड़े भाई के साथ अयातुल्ला अली खामनेई
ईरान शीर्ष नेता अली खामेनेई ने बड़े भाई को जेल में बेशक नहीं डलवाया लेकिन हिरासत में कई बार भेजा गया. हालांकि कई जगहों पर ये कहा गया है कि उन्हें जेल में भी डाला गया. 1990 के दशक में और फिर 1999 के छात्र आंदोलन में जब ईरान में छात्र आंदोलन और क्रांति की स्थितियां पैदा हुईं तो हादी खामेनेई को गिरफ्तार किया गया. कई बार हिरासत में लिया गया. ये काम सत्ताधारी गुट यानी सर्वोच्च नेता अली खामनेई के निर्देश पर ही हुआ.
ईरान में उन्हें मारने की अफवाह फैल चुकी
हादी अब ईरानी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं. बिल्कुल अलग-थलग पड़े हुए हैं. 1999 के छात्र आंदोलन और उसके बाद के वर्षों में उन पर हमले जरूर हुए थे, जिनमें एक बार उन्हें सिर पर गंभीर चोट भी लगी थी. ईरान में कई बार यह अफवाह फैली कि या तो उन्हें जहर दे दिया गया है या नजरबंद कर मार दिया गया है. मगर यह साबित नहीं हुआ.
आज भी ईरान की रिफॉर्मिस्ट मीडिया और कुछ विदेशी पत्रकारों के हवाले से रिपोर्ट आती रहती हैं कि हादी खामेनेई देश से बाहर या अपने घर में नजरबंद सरीखे हालात में हैं, मगर वे जीवित हैं.
दूसरे भाई भी करते रहे हैं शासन की आलोचना
खामनेई के दूसरे भाई मुहम्मद खामनेई भी ईरान के बड़े फिलॉस्फर और इस्लामी विचारकों में गिना जाता है. 1970 के दशक के आखिर में जब ईरान में इस्लामी क्रांति हुई तो उसमें उनकी भूमिका भी काफी बड़ी थी. उनके भाई ने ही सर्वोच्च लीडर बनते ही उन्हें हाशिए पर डाल दिया. वह भी हमेशा अयातुल्ला अली खामनेई के शासन की आलोचना करते रहे हैं. खासकर इस्लाम के नाम पर ईरान में महिलाओं को दबाने की. वह अकादमिक गतिविधियों में लगे हुए हैं.
अयातुल्ला अली खामनेई की बहन बदरिया खामनेई बाएं से दूसरे नंबर. वह ईरान में उनकी सबसे बड़ी आलोचकों में गिनी जाती हैं. उनसे सार्वजनिक तौर पर इस्तीफा भी मांग चुकी हैं
लेकिन लगता है कि खामनेई के अपने भाइयों और बहन से रिश्ते अच्छे नहीं हैं. भतीजे और भाई ही नहीं बल्कि एक बहन बद्री खामनेई भी सार्वजनिक तौर पर उनकी आलोचना कर चुकी है.
बहन भी कर चुकी हैं विरोध, मांग चुकी हैं इस्तीफा
बहन बदरिया खामेनेई ने 2022 में महसा अमीनी विरोध के दौरान एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने भाई के “खिलाफत” और दमन की आलोचना की थी. लेकिन अब या तो वह चुप रहती हैं या चुप करा दी गई हैं.
वर्ष 2022 में खुला पत्र लिखकर अपने भाई अली खामेनेई को तानाशाह कहा और इस्तीफा मांगा. इस पत्र में उन्होंने अली खामेनेई की नीतियों और देश में हो रहे दमन की कड़ी आलोचना की. बदरिया ईरान की सबसे चर्चित महिलाओं में हैं. उनके चार भाई बहन आमतौर पर सार्वजनिक जीवन से दूर रहते हैं. हालांकि उनके बारे में भी कहा जाता है कि उनकी दूरियां अली खामनेई से बढ़ चुकी हैं.
क्या लिखा था उन्होंने भाई के खिलाफ पत्र में
ईरान में रहने वाली खामेनेई की बहन ने लिखा कि उसका भाई “ईरान के लोगों की आवाज नहीं सुनता है. गलत तरीके से अपने भाड़े के सैनिकों और धन-लोलुपों की आवाज को ईरानी लोगों की आवाज मानता है.”
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, मानवीय कर्तव्य के रूप में, उन्होंने ईरानी लोगों की आवाज अपने भाई के कानों तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन निराश होकर उन्होंने उससे संपर्क तोड़ लिया.
बद्री ख़ामेनेई ने अपनी बेटी की हिंसक गिरफ़्तारी पर भी पत्र का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी को इस तरह से गिरफ़्तार किया जाता है, तो “यह स्पष्ट है कि वे दूसरों के उत्पीड़ित बेटे-बेटियों पर हज़ारों गुना अधिक हिंसा करेंगे.”
बद्री खामेनेई की बेटी फरीदे मोरादखानी को तेहरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी प्रॉसिक्यूटर के कार्यालय में बुलाए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी से पहले रिकॉर्ड किए गए आखिरी वीडियो में, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ईरानी सरकार के साथ संबंध खत्म करने का आह्वान किया.
भतीजे भी बड़े आलोचक
उनके दो भतीजे हैं महदी खामेनेई और मोहम्मद तकी खामेनेई, दोनों ने ईरानी सत्ता तंत्र और अली खामेनेई के अधिनायकवादी रवैये की सार्वजनिक आलोचना की. इसके अलावा दो और करीबी रिश्तेदारों मोहसिन खामनेई और फारिदेह मोश्तघी ने समय समय पर सुधारवादियों का साथ दिया. उनके पक्ष में आवाज उठाई और महिला अधिकारों के दमन के खिलाफ आवाज उठाई. एक और भतीजे फ़ाराज़ ख़ामनेई फ्रांस में रहते हैं, वहां से वह हमेशा ईरानी सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करते हैं. पेशे से वह सिविल इंजीनियर हैं. फ़ाराज़ ने ट्विटर (अब X) पर ईरान सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ लगातार पोस्ट किए
नजरबंद भी हुए
2022-2023 के महिला विरोध प्रदर्शनों यानि महसा अमिनी आंदोलन के दौरान खामेनेई के कई भतीजों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सीधे तौर पर शासन की आलोचना की थी, जिसके चलते कुछ को हिरासत में लिया गया या नजरबंद किया गया. इस आंदोलन में खामनेई परिवार के एक सदस्य ने सार्वजनिक तौर पर अपने चाचा के शासन को “तानाशाही” कहा. यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और बाद में उस भतीजे को हिरासत में भी लिया गया. उनके कुछ और रिश्तेदार खामोश रहकर विरोध की मुद्रा में रहते हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर बोलने का जोखिम नहीं उठाते.
खामनेई परिवार में फूट के 5 बड़े कारण
1. राजनीतिक विचारधारा में गहरा अंतर
– अली खामेनेई कठोर इस्लामी शासन और सत्ता केंद्रीकरण के कट्टर समर्थक हैं
– उनके दो भाई हादी और मुहम्मद खामेनेई, बहन बदरिया और कुछ भतीजे रिफॉर्मिस्ट विचारधारा (लोकतांत्रिक इस्लामी शासन, प्रेस की आज़ादी, महिला अधिकार, चुनाव सुधार) के पक्षधर हैं.
– ईरानी क्रांति के बाद देश की दिशा को लेकर ही उनके परिवार में मतभेद पैदा हुए.
2. सत्ता का क्रूर केंद्रीकरण
– 1989 में अली खामेनेई जब सुप्रीम लीडर बने, तो उन्होंने सत्ता तंत्र को पूरी तरह अपने हाथ में कर लिया
– अपने विरोधियों, चाहे वो विपक्षी नेता हों या परिवार के सदस्य, सभी को या तो खामोश कर दिया या हाशिए पर डाल दिया.
– सत्ता में बने रहने के लिए खामेनेई ने कई बार अपने ही भाई हादी और बहन बदरिया को दबाने के लिए सख़्त कदम उठवाए.
3. क्रांति की असली भावना से अलगाव
– 1979 की ईरानी क्रांति में शामिल कई लोग एक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक इस्लामी व्यवस्था चाहते थे.
– खामेनेई और उनके कट्टरपंथी समर्थकों ने इसे तानाशाही धार्मिक तंत्र में बदल दिया.
– इसी वजह से उनके भाई-बहन और परिवार के लोग, जो क्रांति के शुरूआती समर्थक थे, बाद में विरोधी हो गए.
4. मानवाधिकार और सामाजिक मुद्दों पर मतभेद
– खामेनेई के शासन में महिलाओं की आज़ादी, प्रेस की स्वतंत्रता और युवाओं के अधिकारों का दमन हुआ.
– उनकी बहन बदरिया हुसैनी और भाई हादी खामेनेई ने खासकर इन मुद्दों पर कई बार विरोध जताया.
– 2022-23 के महिला विरोध प्रदर्शनों के दौरान ये मतभेद पूरी दुनिया के सामने आ गए.
5. व्यक्तिगत सत्ता मोह और परिवार के भीतर सत्ता संघर्ष
– खामेनेई ने अपने बेटों और पसंदीदा रिश्तेदारों को सत्ता तंत्र में ऊंची जगहें दिलाई, जबकि दूसरे भाई-बहनों को बाहर कर दिया.
-इससे ईर्ष्या, नाराज़गी का वातावरण बना. सत्ता संघर्ष गहरा गया.
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