नशे में था AI पालयट, कनाडा में क्‍या है इस जुर्म की सजा, भारत से कितने हैं अलग

Drunk Pilot, Canedian Aviation Rules and DGCA: फ्लाइट के दौरान एक छोटी सी चूक का नतीजा क्‍या हो सकता है, अहमदाबाद एयर इंडिया प्‍लेन क्रैश इसका सबसे ताजा उदाहरण है. इस हकीकत के बीच यह पता चले कि आपका पायलट अल्‍कोहल के नशे में प्‍लेन उड़ा रहा हैं, तो प्‍लेन में सफर कर रहे पैसेंजर्स की हालत क्‍या होगा, इस बात का सहज अंदाजा कोई भी लगा सकता है. यहां यह जानकार आपको हैरानी होगी कि वैंकूवर से दिल्‍ली एयरपोर्ट के लिए टेकऑफ होने वाली फ्लाइट में कुछ ऐसा ही होने वाला था.

गनीमत रही कि समय रहते इस पायलट के बारे में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस को पता चल गया. हरकत में आई कैनेडियन पुलिस ने पायलट को फ्लाइट से उतार कर हिरासत में ले लिया है. अब बड़ा सवाल यह है कि सैकड़ों पैसेंजर्स की जिंदगी को लेकर बेपरवाही दिखाने वाले पायलट को क्‍या सजा मिलेगी? कनाडा में इस सजा के लिए क्‍या प्रावधान हैं और यदि यह घटना भारत के किसी एयरपोर्ट पर हुई होती, तो डीजीसीए पायलट को क्‍या सजा देता. साथ ही, कैनेडियन एविएशन रूल्‍स इन मामलों में डीजीसीए से कितना अलग हैं?

पहले जानें वैंकूवर में क्या हुआ और पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन

  1. 23 दिसंबर 2025 की दोपहर एयर इंडिया का बोइंग 777 वैंकूवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दिल्ली के लिए तैयार था. फ्लाइट में दो सेट क्रू थे, पहला- एक वैंकूवर से विएना तक, दूसरा- विएना से दिल्ली तक. इस फ्लाइट का एक पायलट वैंकूवर एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री शॉप से अल्‍कोहल खरीद रहा था, तभी एक स्टाफ को उनकी सांसों से अल्‍कोहल की तेज गंध आई.
  2. आरोप यह भी है कि पायलट को ड्यूटी फ्री शॉप पर टेस्टिंग के लिए रखी वाइन को भी चखते हुए देखा गया. एयरपोर्ट स्‍टाफ ने इस हरकत का अंजाम अच्‍छी तरह समझता था, लिहाजा उसने इसकी जानकारी बिना समय गंवाए कैनेडियाई सिक्‍योरिटी को दी. फिर, सीसीटीवी से एयर इंडिया के इस पायलट को ट्रेस किया गया.
  3. कैनेडियाई पुलिस की मौजूदगी में पायलट को एयरक्राफ्ट से बाहर बुलाया गया. दो ब्रेथलाइजर टेस्ट हुए और दोनों का रिजल्‍ट पॉजिटिव आया. ट्रांसपोर्ट ने इसे कैनेडियन एविएशन रेगुलेशन्‍स (CARs) का उल्लंघन मानते हुए पायलट को हिरासत में ले लिया. इसके बाद, एयर इंडिया को 24 दिसंबर को लेटर भेजा गया. लेटर में 26 जनवरी 2026 तक डिटेल्ड इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट और करेक्टिव एक्शन प्लान मांगा गया.
  4. एयर इंडिया ने तुरंत पायलट को ऑफ-रोस्टर कर जांच शुरू कर दी है. साथ ही, इस मामले की जानकारी डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से भी साझा की है. एयरलाइन ने अपने स्टेटमेंट में कहा है कि पैसेंजर सेफ्टी सबसे ऊपर रखते हुए एयरलाइंस की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है. पायलट रिप्लेसमेंट मिलने के बाद फ्लाइट को वैंकूवर से दिल्‍ली के लिए रवाना किया गया.

कनाडा में फ्लाइट क्रू के लिए क्‍या है नियम और उल्‍लंघन पर सजा
कनाडा में पायलट या किसी भी फ्लाइट क्रू के लिए अल्‍कोहल और ड्रग्स को लेकर नियम कैनेडियन एविएशन रेगुलेशंस (CARs) के तहत तय हैं. कनाडा में पायलट्स के लिए यह बुनियादी नियम है कि वह अल्‍कोहल पीने के बाद कम से कम 12 घंटे बाद तक फ्लाइट ड्यूटी नहीं कर सकते हैं. इस नियम को ‘बोटल टू थ्रोटल’ कहा जाता है. नियमों में यह भी स्‍पष्‍ट है कि कोई भी क्रू सदस्‍य अल्‍कोहल या ऐसे किसी ड्रग सब्‍सटैंस के प्रभाव में नहीं होना चाहिए, जिससे उसके काम करने की क्षमता और फ्लाइट सेफ्टी को प्रभावित करती हो.

कनाडा में अल्‍कोहल के नशे में फ्लाइट ड्यूटी करना गंभीर अपराध माना जाता है. इस अपराध के लिए ट्रांसपोर्ट कनाडा एविएशन ऑफेंससे के लिए एडमिनेस्‍ट्रेटिव पेनाल्‍टीज के साथ साथ लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई सकता है. कैनेडियन सिवि‍ल एविएशन रूल्‍स के तहत पायलट पर व्‍यक्तिगत तौर पर 5 हजार कैनेडियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, एयरलाइन ऑपरेटर पर 25 हजार अमेरिकी डॉलर तक जुर्माना लगाकर करेक्टिव एक्‍शन की डिमांड की जा सकती है.

इसके अलावा, एयरलाइन का फॉरेन एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट की शर्तों कड़ा किया जा सकता है या फिर उसे रद्द भी किया जा सकता है. आपको बता दें कि 2018 तक पायलट अल्‍कोहल पीने के 8 घंटे बाद फ्लाइट ड्यूटी ज्‍वाइन कर सकते थे. 2018 में इस नियम को बदला गया और प्रतिबंधित घंटों की अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दी गई. कनाडा में फोकस पूरी तरह से फिट फॉर ड्यूटी को लेकर है.

भारत के DGCA का ‘जीरो अल्कोहल’ मॉडल दुनिया में सबसे सख्त

  1. ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: भारतीय डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) पायलट्स और क्रू के लिए अल्कोहल को लेकर दुनिया के सबसे सख्‍त नियम लागू करता है. डीजीसीए के सिविल एविएशन रेगुलेशन सेक्‍शन 5, सिरीज एफ, पार्ट थ्री और एयरक्राफ्ट रूल्‍स 1937 के तहत उड़ान से पहले और बाद तक ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई गई है.
  2. ‘बॉटल टू थ्रॉटल’ नियम बेहद सख्त : डीजीसीए के नियमों के मुताबिक किसी भी पायलट या क्रू मेंबर को उड़ान से कम से कम 12 घंटे पहले तक अल्‍कोहल, सेडेटिव या किसी भी तरह के स्टिमुलेंट का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है. नियम सिर्फ अल्‍कोहल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अल्कोहल युक्त माउथवॉश, टूथ जेल और मेडिकल प्रोडक्ट्स तक पर पाबंदी है.
  3. जरा-सी मात्रा भी अपराध : प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में अल्कोहल की बेहद मामूली मात्रा भी पॉजिटिव मानी जाती है. डीजीसीए का साफ निर्देश है कि डिटेक्टेबल अल्कोहल मतलब नियम उल्लंघन. यही नहीं, पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे 2025 के ड्राफ्ट नियमों में और ज्यादा सख्त बनाया गया है.
  4. टेस्टिंग सिस्टम और रिकॉर्ड अनिवार्य: देशभर के एयरपोर्ट्स पर बड़े स्तर पर रूटीन प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किए जाते हैं. सभी एयरलाइन ऑपरेटर्स को टेस्ट का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है. 2025 के प्रस्तावित संशोधनों में कहा गया है कि लो-लेवल पॉजिटिव मामलों में काउंसलिंग दी जा सकती है, लेकिन दोहराव होने पर कड़ी सजा तय है.
  5. सख्‍त सजा का है प्रावधान: पहली बार प्री-फ्लाइट टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर 3 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंशन हो सकता है. दूसरी बार गलती करने पर 3 साल तक लाइसेंस निलंबित हो सकता है. तीसरी बार पॉजिटिव होने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा. पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट में पहली बार पॉजिटिव मिलने पर भी 1 साल तक के सस्पेंशन का प्रावधान है. ट्रेनर या इंस्ट्रक्टर की भूमिका में पॉजिटिव पाए जाने पर अलग से 3 साल का बैन लग सकता है. टेस्ट से बचने या स्किप करने की कोशिश पर भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है.

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