Agriculture Tips Hindi: भारत सहित निमाड़ इलाके में किसान सदियों से गाय और भैंस के गोबर से खाद बनाकर खेती करते आ रहे हैं. यह पारंपरिक खाद मिट्टी की बनावट सुधारने और उर्वरता बढ़ाने में काफी मददगार रही है. लेकिन अब कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि एक ऐसी जैविक खाद भी है, जो गोबर की खाद से ज्यादा ताकतवर साबित हो रही है. यह खास खाद भेड़, बकरी और मुर्गी के मल से तैयार होती है. पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह कमजोर और बंजर जमीन को भी दोबारा उपजाऊ बना सकती है.
क्यों ज्यादा असरदार मानी जाती है यह खाद?
किसान भावेश पटेल के मुताबिक भेड़, बकरी और मुर्गी के मल में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (NPK) की मात्रा ज्यादा होती है.
खासकर भेड़ के मल में लगभग:
3% नाइट्रोजन
1% फास्फोरस
2% पोटेशियम पाया जाता है.
यही तत्व फसलों की तेज वृद्धि, मजबूत जड़ें और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी होते हैं. यह खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ाती है, जिससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. बोबडे बताते हैं कि गाय के गोबर की खाद मिट्टी की संरचना सुधारती है, लेकिन भेड़-बकरी और मुर्गी की खाद ज्यादा सघन और पोषक तत्वों से भरपूर होती है.
इसका असर जल्दी दिखाई देता है और फसल की बढ़वार तेज होती है. हालांकि, इसकी उपलब्धता सीमित होने के कारण बड़े स्तर पर हर किसान इसका उपयोग नहीं कर पाता. जिन किसानों के पास पशुपालन या मुर्गी पालन है, वे इसका बेहतर लाभ ले सकते हैं.
ऐसे तैयार करें यह जैविक खाद
सबसे पहले भेड़, बकरी या मुर्गी का मल इकट्ठा करें. इसे किसी गड्ढे या ढेर में जमा करें. ऊपर से सूखी पत्तियां, भूसा या खेत का कचरा डालें. हल्का पानी छिड़ककर ढक दें ताकि सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सके. करीब 40 से 60 दिनों में यह पूरी तरह सड़कर तैयार खाद बन जाती है. इसके बाद इसे खेत में फैलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है.
खेती की लागत घटेगी, पैदावार बढ़ेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जैविक खाद के सही उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी. मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी और उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में भी इजाफा होगा. अगर वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो कमजोर जमीन भी फिर से लहलहा सकती है.
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