Agri Tips: यूं ही नहीं कहते इसे किसानों का ATM, कम लागत में हर रोज मुनाफा, खेती के साथ देती बिजनेस में फायदा

एमपी के निमाड़ में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनसे कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके. ऐसी ही एक फसल है गुलाब की खेती, जिसे आज “किसानों का ATM” कहा जाने लगा है. कारण है कम निवेश, हर रोज़ की कमाई और सालभर बाजार में बनी रहने वाली मांग.
गुलाब का फूल सिर्फ सुंदरता और खुशबू का प्रतीक नहीं, बल्कि यह किसानों के लिए एक मुनाफे की मशीन बन चुका है. गुलाब से बने उत्पाद जैसे गुलकंद, गुलाब जल, इत्र, अगरबत्ती, औषधीय उत्पाद और कॉस्मेटिक आइटम्स की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बढ़ती जा रही है. यही कारण है कि अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान भी गुलाब की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
खंडवा जिले के किसान मांगीलाल पटेल का उदाहरण लें तो पहले वह पारंपरिक गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलें उगाते थे, लेकिन अब उन्होंने गुलाब की खेती शुरू की है. वह बताते हैं कि गुलाब की फसल में केवल 7 से 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत आती है, जबकि महीने भर में यह लागत निकल जाती है और बाकी सालभर मुनाफा ही मुनाफा होता है.

किसान भागीरथ पटेल कहते हैं कि गुलाब की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रोज़ बिकने वाली फसल है. यानी किसान हर दिन या हर हफ्ते अपने फूल स्थानीय बाजार, फूल मंडी या किसी परफ्यूम या कॉस्मेटिक कंपनी को बेच सकते हैं. बाजार में गुलाब की मांग कभी कम नहीं होती चाहे शादी का सीजन हो, त्योहार हों या धार्मिक आयोजन. हर जगह गुलाब के फूलों की जरूरत पड़ती है.

खेती की तैयारी
गुलाब की खेती के लिए सबसे पहले हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. जमीन का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसमें गोबर की खाद या जैविक खाद मिलाना फायदेमंद रहता है. पौधों की रोपाई फरवरी से मार्च या जुलाई-अगस्त के बीच की जा सकती है. अगर मौसम में हल्की नमी हो और तापमान 20 से 30 डिग्री के बीच रहे तो फूलों की बढ़ोतरी अच्छी होती है.

 सिंचाई और देखभाल
गुलाब के पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन नियमित सिंचाई जरूरी है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. शुरुआती दिनों में 7 से 10 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए. पौधों की बढ़वार के साथ-साथ कटाई-छंटाई (Pruning) भी बहुत जरूरी है ताकि नए फूल निकलते रहें और उत्पादन बढ़े. कीटों से बचाव के लिए जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए. खासकर एफिड्स और थ्रिप्स जैसे कीट गुलाब की पत्तियों और कलियों को नुकसान पहुंचाते हैं.

 कमाई का गणित
अगर कोई किसान 1 एकड़ में गुलाब की खेती करता है तो वह लगभग 10 से 12 टन फूल सालभर में उत्पादन ले सकता है. स्थानीय बाजार में गुलाब के फूलों का भाव 40 से 80 रुपये प्रति किलो तक रहता है. यानी एक एकड़ से किसान सालभर में 4 से 8 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.
अगर किसान फूलों को किसी परफ्यूम या गुलकंद बनाने वाली कंपनी को सीधा सप्लाई करे, तो दाम और भी अच्छे मिलते हैं.

 प्रोसेसिंग से बढ़ता है मुनाफा
गुलाब की खेती में सिर्फ फूल बेचकर ही नहीं, बल्कि उससे बने उत्पाद बनाकर मुनाफा कई गुना बढ़ाया जा सकता है. जैसे…
गुलकंद निर्माण: गर्मी के मौसम में इसकी भारी मांग रहती है.
गुलाब जल: सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोग के कारण हमेशा बिकता रहता है.
इत्र और अगरबत्ती: धार्मिक आयोजनों में हर समय मांग बनी रहती है.

कई किसान अब छोटे-छोटे डिस्टिलेशन यूनिट लगाकर गुलाब का तेल और गुलाब जल बनाने लगे हैं, जिससे उनकी कमाई और बढ़ गई है.
 सरकारी सहायता
सरकार भी फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के तहत किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहायता दी जाती है. किसान अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क कर आसानी से योजना का लाभ उठा सकते हैं.

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