उम्र 74 साल, बच्चों के लिए बनाते हैं ऐसे खिलौने, कारीगरी से हर कोई परेशान

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Burhanpur news: ऐसे शख्स की कहानी जो 15 साल की उम्र से ही बच्चों के खिलौने बनाना सीख गए थे. आज भी ये शख्स बच्चों के खिलौने बनाते हैं. यह खिलौने प्लास्टिक के नहीं होते हैं और न ही ज्यादा महंगे होते हैं. जिसकी वजह से छतरपुर जिले में ये खिलौने खूब खरीदे जाते हैं.

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छतरपुरः ऐसे शख्स की कहानी जो 15 साल की उम्र से ही बच्चों के खिलौने बनाना सीख गए थे. आज भी ये शख्स बच्चों के खिलौने बनाते हैं. यह खिलौने प्लास्टिक के नहीं होते हैं और न ही ज्यादा महंगे होते हैं. जिसकी वजह से छतरपुर जिले में ये खिलौने खूब खरीदे जाते हैं.

दरअसल, महोबा के रहने वाले 74 वर्षीय मलखान जो पिछले 60 सालों से एक ऐसा बिजनेस कर रहे हैं, जिसमें खुद ही वह बच्चों के खिलौने बनाते हैं और खुद ही घूम-घूम कर इन खिलौनों को बेचते हैं. जिससे इन्हें बढ़िया मुनाफा भी हो जाता है.

बच्चों के लिए बनाते हैं ये आइटम

लखान दादा बताते हैं कि जब वह 15 साल के थे तब से बच्चों के खिलौने बनाना सीख गए थे और तभी से उन्होंने बच्चों के खिलौने बनाना शुरू कर दिए और आज भी 74 साल की उम्र में अपने हाथों से ही बच्चों के खिलौने बना रहे हैं. वह बच्चों के खिलौने बनाते हैं जिसमें ककड़िया, पंखे और हनुमान जी का गदा शामिल होता है. इन खिलोनों की डिमांड छतरपुर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में हमेशा बनी रहती है. भले ही वह महोबा के रहने वाले हैं लेकिन छतरपुर जिला यहां से लगा हुआ है तो वह यहां आते-जाते रहते हैं. यहां के हॉट बाजार हों या छोटे से लेकर बड़े मेले हों हर मेले में पहुंचते है.  साथ ही छतरपुर शहर में दीपावली के समय जो मेले लगता है वहां भी पहुंचता हूं.

हर दिन होती है इतनी कमाई

वह बच्चों के लिए जो खिलौने बनाते हैं यह बेहद ही सस्ते दामों में बिकते हैं. हर आयटम 10 रुपए में बेचते हैं जिससे कि यह खिलौने कुछ ही घंटों में खत्म हो जाते हैं. मलखान बताते हैं कि हर दिन उन्हें खिलौने बेचकर 1000 रुपए की कमाई हो जाती है जिससे उनकी रोजी-रोटी आराम से चल जाती है. वह चाहे तो घर बैठकर आराम से खा सकते हैं लेकिन उनका मानना है कि जितना चलते-फिरते रहेंगे उतना मन से भी खुश रहेंगे और शरीर से भी स्वस्थ रहेंगे. इसलिए इस उम्र में भी खिलोने बनाकर घूमना उन्हें बेहद ही पसंद है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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