अगस्त्य ऋषि का प्रिय पौधा! बीमारियों में रामबाण, सिरदर्द से डायबिटीज तक असरदार

Last Updated:

Health Tips: डॉक्टर आरपी परौहा ने कहा कि अगस्त के पेड़ का काढ़ा सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार में काफी प्रभावी होता है. इसके फूलों से बना काढ़ा न सिर्फ मौसमी बीमारियों को दूर करता है बल्कि कब्ज में भी राहत देता है.

सीधी. मध्य प्रदेश में बदलते मौसम के बीच सर्दी, खांसी-जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही हैं. ऐसे में अगस्त का पेड़ किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं माना जा रहा है. यह अगस्त्य ऋषि का प्रिय पौधा है. इस औषधीय पौधे के जड़, छाल, तना, पत्तियां, फूल, फल और बीज सभी का अलग-अलग उपयोग होता है. आयुर्वेद में इसे कई रोगों के इलाज में बेहद कारगर बताया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों और फूलों का काढ़ा बनाकर सेवन करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों में राहत मिलती है. सीधी के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अगस्त का पेड़ औषधीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. इसके जड़, छाल, पत्तियां, फूल, फल और बीज, सभी भाग विभिन्न बीमारियों के उपचार में उपयोगी माने जाते हैं. उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इसका उपयोग किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों में लाभ पहुंचा सकता है.

डॉक्टर परौहा के अनुसार, अगस्त के पेड़ का काढ़ा सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार में काफी प्रभावी होता है. इसके फूलों से बना काढ़ा न केवल मौसमी बीमारियों को दूर करता है बल्कि कब्ज की समस्या में भी राहत देता है. वहीं इसकी पत्तियों का स्वरस (रस) निकालकर नाक में डालने से माइग्रेन में फायदा बताया गया है. खास बात यह है कि इसे माइग्रेन के विपरीत दिशा वाली नाक में डाला जाता है.

याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक
डॉक्टर परौहा ने आगे कहा कि इसके अलावा यह पेड़ आंखों की समस्याओं, महिलाओं में श्वेत प्रदर, गठिया (अर्थराइटिस) और पेट संबंधी बीमारियों में भी लाभकारी माना जाता है. यह याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक है और इसके बीजों से तेल भी निकाला जाता है, जिसका उपयोग औषधीय रूप में किया जाता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर औषधि का प्रभाव अलग-अलग होता है और इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी औषधि का सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है.

आयुर्वेद को बढ़ावा देने का प्रयास
विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक पद्धति के जरिए कई बीमारियों का प्रभावी उपचार संभव है, यही वजह है कि सरकार भी आयुर्वेद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है. ऐसे में जरूरी है कि लोग प्राकृतिक औषधियों का उपयोग करें लेकिन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *