थर्ड वर्ल्ड वार शुरू? यूक्रेन, ईरान के बाद दक्षिण चीन सागर में हलचल; धुकधुकी बढ़ी

Third World War: विश्व युद्ध की आशंका इन दिनों चरम पर पहुंच गई है. मार्च 2026 के मध्य में वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तीन प्रमुख मोर्चों पर उबाल पर है. यूक्रेन में रूस का आक्रमण, मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान का सीधा युद्ध और अब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता. पूर्व नाटो कमांडरों और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों संघर्ष एक-दूसरे से जुड़कर दुनिया को थर्ड वर्ल्ड वार की दहलीज पर खड़ा कर रहे हैं. विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर में हाल की घटनाओं ने जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे देशों में चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण चीन सागर में चीन की हजारों मछली पकड़ने वाली नौकाओं की असामान्य गतिविधियां देखी जा रही है.

चीन के हितों पर हमला

उधर जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया. इस बंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई है, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इतिहास की सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज की घोषणा की, लेकिन संकट गहराता जा रहा है. ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा, जिससे यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट और गहरा गया है.

रूस-यूक्रेन के बीच जंग पांचवे साल में प्रवेश कर गया है. इससे भारी तबाही हुई है. फोटो- रायटर

पांच सालों से रूस यूक्रेन जंग

इस बीच, पूर्वी यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है. रूस ने मिसाइल अभियानों को तेज किया है, जबकि अमेरिका अपनी सेना और संसाधनों का बड़ा हिस्सा ईरान मोर्चे पर स्थानांतरित कर चुका है. यूक्रेन को नाटो से सहायता मिल रही है, लेकिन अमेरिकी हथियारों की कमी के कारण खालीपन पैदा हुआ है. रूस ने हाल ही में अपनी मांगों को और सख्त किया है, जिससे नाटो के साथ टकराव की आशंका और बढ़ गई है. यही नहीं ईरान संकट में तेल के भाव बढ़ने से रूसी तेल की डिमांड बढ़ी है और वह जमकर कमाई कर रहा है. यानी बीते 15 दिनों में रूस की आर्थिक ताकत बढ़ी है वहीं यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन में कमी आई है. ऐसे में यदि रूस किसी नाटो सदस्य देश पर हमला करता है, तो यह वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है.
साउथ चाइन सी में चीन की गतिविधियां बढ़ गई है. फोटो- रायटर

दक्षिण चीन सागर में सबसे बड़ा खतरा

लेकिन सबसे बड़ा खतरा दक्षिण चीन सागर से जुड़ा है, जिसे तीसरा मोर्चा कहा जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 13 मार्च को हजारों चीनी नौकाओं की पूर्वी चीन सागर में असामान्य गतिविधियां देखी गई. यह समुद्री इलाका दक्षिण चीन सागर से जुड़ा क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये नौकाएं चीन की मैरीटाइम मिलिशिया का हिस्सा हैं, जो सैन्य उद्देश्यों क लिए इस्तेमाल हो सकती हैं. जैसे ब्लॉकेड, क्षेत्र नियंत्रण या संकट में सैन्य सहायता. ये घटनाएं दिसंबर और जनवरी में हुई समान गतिविधियों की निरंतरता हैं, लेकिन अब स्केल बड़ा है. चीन ने अमेरिका-फिलीपींस-ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अभ्यासों के जवाब में कॉम्बैट रेडीनेस पेट्रोल बढ़ाए हैं.

उधर, अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया और जापान के इलाकों से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स को मध्य पूर्व की ओर भेज दिया है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा खालीपन हो गया है. चीन इसे अवसर मानकर ताइवान या विवादित जल क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा सकता है.

जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया चिंतित

इन सभी कारणों से जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया में चिंता बढ़ गई है. जापान पूर्वी चीन सागर में सेनकाकू/डियाओयू द्वीपों पर चीन से टकराव का सामना कर रहा है. वियतनाम दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता से प्रभावित है, जबकि दक्षिण कोरिया क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंतित है. यदि अमेरिका-चीन के बीच कोई नौसैनिक टकराव होता है, जैसे जहाजों की टक्कर. तो यह वैश्विक युद्ध का ट्रिगर बन सकता है. विश्लेषकों के अनुसार इस वक्त दुनिया को वर्ल्ड वार की दहलीज पर पहुंचाने वाले तीन प्रमुख कारण हैं- पहला, अमेरिका-चीन का सीधा टकराव, दूसरा- नाटो का रूस के साथ युद्ध में शामिल होना, ईरान और स्ट्रेट ऑफर होर्मुज का बंद होना. वर्तमान में दुनिया एक नाजुक संतुलन पर टिकी है. अमेरिका दो मोर्चों पर फंसा है, जबकि चीन और रूस इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं. यदि कोई छोटी सी गलती या मिसकैलकुलेशन होता है, तो क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक युद्ध में बदल सकता है.

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