इंदौर के एमवाय अस्पताल में दो नवजातों को चूहों द्वारा कुतरने और उसके बाद उनकी मौत होने के बाद हमलावर हुई कांग्रेस और जयस के विरोध के बीच एक बदलाव किया है। अब अस्पताल में डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के रूप में नियुक्त किया है। उन्हें वि
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डीन द्वारा निकाला गया आदेश।
सोमवार रात जारी हुआ आदेश यह आदेश एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने सोमवार देर रात जारी किया है। चर्चा कि रोजाना इस मामले में नित नए खुलासे, पेस्ट कंट्रोल की लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रुख आदि के मद्देनजर ठोस कार्रवाई नहीं होने के बीच लिया गया है। इस मामले में लगातार कई झूठ सामने आ रहे हैं।
इसके पूर्व शनिवार को तब बड़ा झूठ सामने आया जब रात को धार निवासी दंपती अपने नवजात (बच्ची) का शव अपने गांव से गए। वहां उन्होंने बॉक्स के अंदर प्लास्टिक से लिपटी बच्ची का शव देखा। उसकी एक हाथ की चार अंगुलियां चूहे खा चुके थे। जबकि इसके पूर्व अस्पताल के अधिकारियों द्वारा रोज झूठ बोले जा रहे थे। पहले यह बयान दिया था कि दोनों नवजातों को चूहे ने मामूली कुतरा है।
मामले में पहले से ही पेस्ट कंट्रोल करने वाली एजाइल कंपनी जांच के घेरे में थी। डीन ने चेतावनी देने के साथ एक लाख रु. का फाइन भी लगाया था। इसके साथ ही घटना के दौरान NICU में डूयटी पर रही दो नर्सों को सस्पेंड करने, नर्सिंग सुपरिटेडेंट को हटाने के साथ छह को शोकाज नोटिस जारी किए थे। फिर केस की राज्य स्तरीय टीम के साथ मेडिक एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी इंदौर आए।
उन्होंने खुद यूनिट सहित अन्य यूनिटों में देखा कि चूहों की आवाजाही कहां से हैं। इस दौरान वहीं एक-दो चूहे भी नजर आए। उन्होंने एजाइल कंपनी के दस्तावेजों का अध्ययन कर माना कि कंपनी का काम संतोषजनक नहीं है जबकि करोड़ों का भुगतान किया गया है।
उधर, डॉक्टर्स और नर्सों इस बात को लेकर विरोध था कि वे नवजातों का इलाज करें, नए एडमिट होने वाले नवजातों को संभाले या चूहे पकड़े या भगाए। मामले में छोटे लोगों पर कार्रवाई की गई। इस मामले में सबसे पहली जिम्मेदारी पेस्ट्र कंट्रोल करने वाली एजाइल कंपनी और फिर वरिष्ठ प्रभारी डॉक्टरों की थी।

परिजन ने घर पहुंचकर बॉक्स खोला तो देखा कि नवजात की चार उंगलियों को चूहों ने खा लिया था।
बार-बार चूहों की मौजूदगी और लापरवाही दर्ज होने के बावजूद कंपनी को न तो ब्लैकलिस्ट किया गया और न ही ठेका निरस्त किया गया था। एजाइल को हर माह औसतन 1.65 करोड़ रुपए का भुगतान हो रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में सितंबर तक 11 करोड़ रुपए का आंवटन मेडिकल कॉलेज काे आवंटन हो चुका है।
वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी को शासन से 15.28 करोड़ और कॉलेज की स्वशासी संस्था से 5.57 करोड़, कुल 20.85 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ था। भुगतान प्रक्रिया काॅलेज के सर्विस सेक्शन द्वारा तय करता है, लेकिन अंतिम अधिकार सिर्फ डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के पास हैं।

एजाइल पिछले डेढ़ साल से अस्पताल की सफाई और सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही है। कंपनी की रिपोर्ट में जनवरी से अब तक अस्पताल परिसर में 150 से ज्यादा चूहों के मिलने की जानकारी दर्ज है।
कंपनी का दावा है कि वह हर माह चूहों को अस्पताल से भगाने के लिए 2 लाख रुपए से ज्यादा के केमिकल आदि पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद ठेका जारी रखा गया। दिसंबर 2023 में भी लापरवाही पर कमिश्नर ने 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था लेकिन हर बार कंपनी को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
2017 में कॉलेज ने केंद्र सरकार के उपक्रम एचएलएल हाइट्स से अनुबंध किया था। हाइट्स ने सुरक्षा और सफाई का ठेका निजी कंपनियों को सौंपा। पहले यह काम यूडीएस के पास था, 2023 से एजाइल कंपनी यह काम देख रही है। ठेके की शर्तों के मुताबिक अस्पताल परिसर की पूरी सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की है।
अनुबंध में साफ लिखा है कि लापरवाही पर कॉलेज प्रबंधन कभी भी ठेका निरस्त कर सकता है। बावजूद इसके, मौत जैसी गंभीर घटना के बाद भी कंपनी पर केवल जुर्माना लगाकर खानापूर्ति कर दी गई।
इस घटना के बाद एंजिल कंपनी का पेस्ट कंट्रोल कॉन्ट्रेक्ट समाप्त कर दिया गया लेकिन अधिकारिक बयान नहीं दिया गया। खुद कंपनी के इंदौर के कर्ताधर्ता अतुल मराठे और प्रदीप रघुवंशी मीडिया से बचने के लिए गायब हो गए।
‘दैनिक भास्कर ने उन्हें कई बार फोन लगाए लेकिन उन्होंने नहीं उठाए। वे अस्पताल में घटना के बाद से ही फटके तक नहीं है। यहां तक कि दो मैसेज करने के बाद भी जवाब नहीं दिया और न ही फोन लगाया।
इस बीच मामले ने और तूल पकड़ा और सोमवार रात डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंडेंट के रूप में नियुक्त कर एजाइल कंपनी के कामों के प्रभार की जिम्मेदारी दी गई। मौजूदा सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव अभी सवालों में घिरे हैं। इसके चलते संभव है कि डॉ. कछारिया को ज्यादा जिम्मेदारी और मिल जाए।
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