आमतौर पर लोग यौन संबंध बनाने के बाद कंडोम का इस्तेमाल करके इधर-उधर फेंक देते हैं. इंडियनएक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, कंडोम का इस्तेमाल करने के बाद इसे कहीं भी फेंकना न सिर्फ खराब स्वच्छता की आदत है, बल्कि यह इंफेक्शन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने का भी कारण बन सकता है. कचरा प्रबंधन की एक गंभीर समस्या भी है.
नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं कंडोम
सेनेटरी पैड, डायपर की ही तरह कंडोम भी नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं. ये जल्दी गलते या सड़ते नहीं हैं. इन्हें इसके लिए वर्षों लग सकते हैं. इससे पहले से बढ़ रही स्वच्छता संबंधी समस्या और गंभीर हो सकती हैं. इंडियनएक्सप्रेस में पीएसआरआई हॉस्पिटल में यूरोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रशांत जैन द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू के अनुसार, इस्तेमाल किए गए कंडोम को फेंकने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि आप उसे अच्छी तरह से टिश्यू पेपर, अखबार, पेपर बैग या बायोडिग्रेडेबल पेपर में लपेटकर बंद डस्टबिन में डाल दें. इतना ही नहीं, कंडोम को उतारते समय सावधानी बरतनी चाहिए. खुले हुए सिर पर गांठ बांध देनी चाहिए ताकि वीर्य (semen) का रिसाव न हो.
कंडोम को गलत तरीके से फेंकने से होंगी सेहत की समस्याएं?
कंडोम को कभी भी खुले स्थानों, घर की बालकनी,कमरों, टॉयलेट में ऐसे नहीं फेंकना चाहिए. खासकर जब घर में छोटे-छोटे बच्चे हों. बच्चे इसे गलती से छू सकते हैं. बेहद जरूरी है कि आप इस्तेमाल के तुरंत बाद ही इसे बांध दें ताकि स्पर्म बाहर न आए. कंडोम में शारीरिक तरल पदार्थ होते हैं, जिनमें बैक्टीरिया, वायरस और अन्य कीटाणु पनप सकते हैं. अगर कोई सीधे इनके संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा रहता है. हालांकि, थोड़े समय के संपर्क से गंभीर संक्रमण होने की संभावना कम हो सकती है, लेकिन जोखिम फिर भी बना रहता है. खासकर उन बीमारियों का जो शारीरिक तरल पदार्थों के जरिए फैलती हैं जैसे कि एचआईवी.
खुला फेकने से होंगे ये नुकसान
यदि आप कंडोम को खुला ही बाहर कहीं भी फेक देते हैं तो इससे वीर्य में मक्खियां, कीड़े या चूहे आकर्षित हो सकते हैं. इससे भी इंफेक्शन का जोखिम और बढ़ जाता है. ऐसे में कूड़ा-कचरा उठाने वाले सफाई कर्मियों के लिए भी यह हेल्दी नहीं होता है.
क्या कंडोम को टॉयलेट में कर सकते हैं फ्लश?
काफी लोग यौन संबंध बनाने के तुरंत बाद ही कंडोम को टॉयलेट में जाकर फ्लश कर देते हैं. ऐसा करना भी सही नहीं है. ऐसा इसलिए, क्योंकि ये रबड़ की तरह होते हैं, जो पानी में गलते या घुलते नहीं हैं. इससे टॉयलेट की सीवेज सिस्टम जाम हो सकती है. इससे प्लंबिंग को नुकसान हो सकता है.