दो दिनों तक डॉलर को पटखनी देने के बाद औंधे मुंह गिरा रुपया, RBI की दखल के बावजूद क्यों दबाव में

Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये पर एक बार फिर जबरदस्त दबाव देखने को मिला है. दो दिनों तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाने के बाद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया तीन पैसे टूटकर 89.90 प्रति डॉलर पर आ गया. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी ने घरेलू मुद्रा को कमजोर किया है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है.

क्यों टूट रहा रुपया?

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजारों में नरमी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 89.96 पर खुला और बाद में हल्की रिकवरी के बावजूद 89.90 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की गिरावट को दर्शाता है.

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बुधवार को रुपये को कुछ राहत मिली थी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते रुपया 31 पैसे मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 89.87 पर बंद हुआ था. इसी दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 98.69 पर बना रहा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि आरबीआई की सक्रियता से फिलहाल गिरावट पर कुछ हद तक अंकुश लगा है. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, रिजर्व बैंक ने 90.23 के स्तर पर डॉलर बेचकर यह संकेत दिया कि मुद्रा बाजार में एकतरफा चाल को स्वीकार नहीं किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रुपये की आगे की दिशा को लेकर अभी स्पष्ट अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन जनवरी में रुपया 89.50 से 90.50 के दायरे में बना रह सकता है.

इधर, घरेलू शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 255.86 अंक गिरकर 84,705.28 पर और निफ्टी 65.90 अंक टूटकर 26,074.85 पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60.19 डॉलर प्रति बैरल रहा. वहीं, शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध रूप से 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचने वाले रहे, जिससे रुपये और शेयर बाजार दोनों पर दबाव और बढ़ गया.

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