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65 की उम्र के बाद नींद का टूटना आम है, लेकिन दवा ज़रूरी नहीं. आयुर्वेद के आसान उपाय जैसे गुनगुना दूध + जायफल, तिल के तेल की मालिश और हल्का प्राणायाम बुज़ुर्गों को गहरी व सुकून भरी नींद दिलाने में मदद करते हैं. प्राकृतिक तरीके से तनाव घटाएँ और सुबह तरोताज़ा उठें.
65 साल की उम्र के बाद नींद का टूटना, बार-बार करवट बदलना और सुबह थकान महसूस होना आम समस्या बन जाती है. कई लोग दवा लेना नहीं चाहते ऐसे में आयुर्वेद का आसान और घरेलू तरीका राहत दे सकता है.

आयुर्वेद के अनुसार नींद केवल आराम नहीं बल्कि मन शरीर और आत्मा को दोबारा ऊर्जा देने का समय है. सही नींद न मिले तो चिड़चिड़ापन, कमजोरी और तनाव बढ़ने लगता है खासकर 65+ उम्र में इसका असर ज्यादा दिखता है.

सर्वोदय हॉस्पिटल फरीदाबाद के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चेतन शर्मा बताते हैं कि बुज़ुर्गों में अनिद्रा और स्लीप एपनिया की शिकायत आम है. लोग बिस्तर पर तो लेटते हैं लेकिन गहरी नींद नहीं आ पाती.
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सोने से पहले एक कप गुनगुना दूध लें और उसमें एक चुटकी जायफल मिलाएँ. यह नसों को शांत करता है और दिमाग को रिलैक्स करता है जिससे नींद आने में आसानी होती है और बार-बार नींद टूटती नहीं.

रात को सोने से पहले पैरों के तलवों पर हल्के गर्म तिल के तेल से मालिश करें. इससे शरीर की थकान कम होती है रक्त संचार बेहतर होता है और दिमाग को आराम मिलता है जो गहरी नींद में मदद करता है.

सोने से पहले 5–10 मिनट गहरी साँसों वाला प्राणायाम करें. धीरे-धीरे साँस अंदर लें और बाहर छोड़ें. इससे तनाव कम होता है दिल की धड़कन शांत होती है और नींद स्वाभाविक रूप से आने लगती है.

यह आयुर्वेदिक स्लीप हैक पूरी तरह प्राकृतिक है और 65+ उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है. बिना दवा तनाव कम होता है नींद गहरी आती है और सुबह शरीर हल्का महसूस होता है.