मध्यप्रदेश सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती 2022 को लेकर चल रही लंबी कानूनी अड़चन आखिरकार खत्म हो गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती पर लगी अंतरिम रोक वापस लेते हुए प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दे दिए हैं। इसके साथ ही बीते चार वर्षों से अटकी भर्ती को अब गति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी, लेकिन इसे रोका नहीं जाएगा। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक कर दिए गए हैं और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए नि:शुल्क कोचिंग भी शुरू कर दी गई है। अनियमितताओं और आरक्षण को लेकर चुनौती सिविल जज भर्ती 2022 को नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, शत-प्रतिशत आरक्षण लागू करने और अनारक्षित वर्ग में योग्यता के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शामिल नहीं करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एससी-एसटी अभ्यर्थियों के चयन पर गंभीर चिंता जताते हुए पुनर्विचार के निर्देश दिए थे। न्यूनतम अंकों में राहत के निर्देश कोर्ट ने परीक्षा सेल को निर्देश दिए हैं कि न्यूनतम अर्हता अंकों में स्थिरता रखते हुए नई सूची तैयार की जाए। आदेश में कहा गया कि मुख्य परीक्षा के लिए एससी वर्ग के लिए न्यूनतम 45% और एसटी वर्ग के लिए न्यूनतम 40% अंक निर्धारित किए जाएं। साथ ही साक्षात्कार के न्यूनतम 20 अंकों में भी राहत देने को कहा गया है। चयन में कम प्रतिनिधित्व पर कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि 191 पदों के लिए हुई परीक्षा में केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन हुआ और 121 पद खाली रह गए। सबसे गंभीर बात यह रही कि एसटी वर्ग से एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हुआ, जबकि एससी वर्ग से सिर्फ एक उम्मीदवार चयनित हुआ। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताया था। परीक्षा परिणाम और टॉपर्स हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब संशोधित सूची और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। .