30 साल की मेहनत के बाद गंजेपन का इलाज, इस एक दवा से बाल झड़ना रुकेगा, भर-भरकर आएंगे सिर पर बाल, वैज्ञानिकों ने निकाला तोड़

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Acne Drug can Treat Baldness: बाल झड़ना आज के मर्दो की बहुत बड़ी समस्या है. 20-22 साल की उम्र में ही बाल गिरने शुरू हो जाते हैं. कुछ लोगों में तो आधे सिर के बाल 30 से पहले चले जाते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. वैज्ञानिक कई तरह की रिसर्च पर काम कर रही है. हाल में वैज्ञानिकों ने इसका तात्कालिक तोड़ निकाला है. दरअसल, पहले से ही मौजूद कील-मुंहासे की दवा से बाल झड़ने की समस्या को रोकने का समाधान निकाला है.

झड़ते बालों के लिए दवा.

Acne Drug can Treat Baldness: गंजापन या सिर से बालों का झड़ना आज के युवाओं की आम समस्या बनती जा रही है. जवान लड़के के सिर से बाल गायब हो रहे हैं. पहले के जमाने में 50-60 साल के बाद ही सिर से बाल झड़ते थे. यहां तक कि बाल काला भी खूब होते थे लेकिन आज 20-25 साल की उम्र में बालों का बुरा हाल हो जाता है. किसी के बाल झड़ने लगते हैं तो कोई गंजा हो जाता है, किसी के बाल पतले हो जाते हैं तो किसी के बाल बेजान हो जाते हैं. अच्छी बात यह है कि झड़ते हुए बालों को रोकने के लिए या गंजेपन की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए वैज्ञानिक रात दिन दिन लगे हुए हैं और वे इसकी दवा बनाने के बहुत करीब आ गए हैं. इस बीच वैज्ञानिकों ने इसका तात्कालिक समाधान निकाल लिया है. दरअसल, चेहरे पर कील-मुंहासे की एक दवा वैज्ञानिकों ने बनाई थी जिसे पांच साल पहले ही मंजूरी मिली थी. अब इस दवा से ही गंजेपन का इलाज करने का दावा किया जा रहा है.

बालों को झड़ने से रोकने की बहुत बड़ी उपलब्धि 

जर्नल ऑफ ड्रग इन डर्मेटोलॉजिस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक कील-मुंहासे की दवा क्लैस्कोटेरोन (clascoterone) को जब गंजे सिर पर लगाया गया तो गंजेपन के लिए जिम्मेदार हार्मोन में आश्चर्यजन रूप से कमी आ गई. डिहाइड्रोटेस्टेरोन dihydrotestosterone (DHT) नाम का हार्मोन जब ज्यादा रिलीज होने लगता है तब सिर के नीचे हेयर फॉलिकल्स को सिकोड़ देता है. यानी जिस लूप से होकर बाल निकलते हैं वह लूप इतनी संकरी हो जाती है कि बाल वहां से निकल नहीं पाते. पुरुषों में गंजेपन का ज्यादातर कारण यही होता है. क्लैस्कोटेरोन दवा इस फॉलिकल्स को सिकुड़ने से बचाती है. वैज्ञानिकों का दावा है कि एंड्रोजेनिक एलोपेसिया बीमारी यानी गंजेपन से पीड़ित बीमारी के मरीजों पर तीन फेज का ट्रायल हो चुका है जिससे परिणाम बहुत बेहतर आया है. अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो पिछले 30 सालों में झड़ते बालों को रोकने का सबसे बड़ा इलाज साबित हो सकता है. चूंकि क्लैस्कोटेरोन सिर पर उसी भाग में डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) को ब्लॉक करता है जहां इसकी जरूरत है. इसलिए उम्मीद है कि यह फिनास्टेराइड जैसे ओरल ऐंटी-एंड्रोजन की तुलना में हार्मोनल दुष्प्रभाव पैदा किए बिना यह दवा बालों के ग्रोथ को बढ़ा सकता है.

क्लैस्कोटेरोन कैसे काम करता है 

पुरुषों में होने वाले पैटर्न बाल्डनेस को रोकने की प्रक्रिया में क्लैस्कोटेरोन कैसे काम करता है, आइए इसके बारे में जानते हैं. सबसे पहले यह जानते हैं कि गंजापन या बाल कम क्यों हो जाते हैं. पुरुषों में एक हार्मोन बनता है टेस्टोस्टेरॉन. इसी का एक हार्मोन है डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन यानी DHT. इसी हार्मोन को पुरुषों में गंजेपन का विलेन माना जाता है. जिन पुरुषों में आनुवंशिक प्रवृत्ति होती है उनमें DHT सिर के हेयर फॉलिकल के डर्मल पैपिला कोशिकाओं में स्थित एंड्रोजन रिसेप्टर्स से चिपक जाता है. इससे प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हेयर फॉलिकल को छोटा कर जाती है और बालों की ग्रोथ फेज को कम कर देती है और अंततः बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं. क्लैस्कोटेरोन एक टॉपिकल ऐंटी-एंड्रोजन है. यह सीधे स्किन पर काम करता है. अध्ययनों से पता चला है कि जब इसे सिर पर लगाया जाता है तो यह उन्हीं एंड्रोजन रिसेप्टर्स से प्रतिस्पर्धी रूप से जुड़ जाता है और DHT को वहां चिपकने से रोक देता है. इस तरह यह एंड्रोजन-जनित फॉलिकल सिकुड़न को रोक देता है.

कोई साइड इफेक्ट नहीं

अब तक बालों को झड़ने से रोकने के लिए जो दवाइयां हैं, उसके साइड इफेक्ट्स भी काफी है. इसमें मूड का चिड़चिड़ापन, एंग्जाइटी और मुख्य रूप से यौन उत्तेजना में कमी जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिलता है लेकिन यह दवा क्रीम है जिसे सिर पर लगाया जाता है. इसलिए यह सिर की कोशिकाओं को ही प्रभावित करता है. इसका मेटाबॉलिज़्म बहुत तेज़ है, इसलिए दवा शरीर में व्यापक रूप से अवशोषित हो जाती है. इसके परिणामस्वरूप किसी भी प्रकार के सिस्टम-स्तर के साइड-इफेक्ट्स का जोखिम बेहद कम रहता है. इसमें शरीर के अंदर हार्मोन का जो स्वभाविक स्त्राव है, उससे किसी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं होता है. यानी इससे साइड इफेक्ट्स भी न के बराबर है.

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Lakshmi Narayan

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