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Burhanpur News: कथा वाचक पंडित आदित्य हरि कृष्ण मुखिया ने बताया कि जब मेरे पिताजी भागवत कथा का रसपान कराते थे. तब मैं छोटा था तो मैं भी व्यास पीठ पर बैठने के लिए जिद करता था. लेकिन तब मेरे पिता मुझे यह कहते थे कि इसका ज्ञान अर्जित करने के बाद ही आप इस गाड़ी पर बैठ सकते हैं. मैंने मेरे पिता से ही पंडिताई सिखी और उसके बाद अब मैं एक कथावाचक के रूप में कार्य कर रहा हूं.
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के इतवारा क्षेत्र में रहने वाले पंडित आदित्य हरि कृष्ण मुखिया अपने पिता से प्रेरित होकर पंडित बने और उन्होंने भागवत कथा करना शुरू कर दिया. उनका कहना है कि मैने 25 साल की उम्र में ही भागवत कथा की शुरुआत कर दी थी. पहली कथा अपने घर से ही शुरू की थी आज मध्यप्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और यूपी में भी कथा कर चुका हूं. 7 सालों में मैने 25 से अधिक कथा की है.
लोकल 18 की टीम ने जब कथा वाचक पंडित आदित्य हरि कृष्ण मुखिया से बात की तो उन्होंने बताया कि जब मेरे पिताजी भागवत कथा का रसपान कराते थे. तब मैं छोटा था तो मैं भी व्यास पीठ पर बैठने के लिए जिद करता था. लेकिन तब मेरे पिता मुझे यह कहते थे कि इसका ज्ञान अर्जित करने के बाद ही आप इस गाड़ी पर बैठ सकते हैं. मैंने मेरे पिता से ही पंडिताई सिखी और उसके बाद अब मैं पिछले 7 वर्षों से श्रीमद् भागवत कथा कर रहा हूं. मेरे द्वारा अभी तक मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और यूपी में कथाएं की गई है मैं 7 साल मैं 25 से अधिक कथाएं कर चुका हूं.
अधिवक्ता से बने पंडित
मैंने एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिवक्ता की डिग्री हासिल कर ली है मैं समय-समय पर कोर्ट में प्रैक्टिस भी करते रहता हूं और अब कथा का वाचन कर रहा हूं. लोग मुझे पसंद करने लगे हैं. इसलिए सालों पहले ही कथाएं बुक कर लेता हूं उसके बाद में इन स्थानों पर कथाएं पढ़ने के लिए जाता हूं संगीतमय कथा करता हूं. इसलिए लोगों को भी बड़ी पसंद आती है और आज के दौर में युवा से लेकर तो बुजुर्ग भी भक्ति का मार्ग चुन रहे हैं.
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