नई दिल्ली33 मिनट पहले
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सहारा ग्रुप ने 6 सितंबर को अडाणी प्रॉपर्टीज के साथ 88 प्रॉपर्टी बेचने का समझौता किया, जिसे कोर्ट से मंजूरी चाहिए।
सहारा इंडिया कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट से अपने महाराष्ट्र की अंबी वैली और लखनऊ की सहारा शहर सहित 88 प्रॉपर्टी अडाणी ग्रुप को बेचने की इजाजत मांगी है। कंपनी की मांग पर 14 अक्टूबर को सुनवाई हो सकती है।
सहारा ग्रुप ने 6 सितंबर को अडाणी प्रॉपर्टीज के साथ 88 प्रॉपर्टी बेचने का समझौता किया, जिसे कोर्ट से मंजूरी चाहिए। SICCL ने बताया कि ये डील न सिर्फ उनकी संपत्तियों से अच्छी कीमत निकालेगी, बल्कि कोर्ट के आदेशों के मुताबिक बकायों का भुगतान करने में भी मदद करेगी।
इससे पहले भी सहारा ने कई चल और अचल संपत्तियों को बेचकर करीब 16,000 करोड़ रुपए जुटाए हैं, जिसे सेबी के सहारा रिफंड अकाउंट में जमा किया गया है। कंपनी के निवेशकों और अन्य लोगों को उनका बकाया यहीं से मिलेगा।

ग्रुप के मालिक सुभ्रत रॉय की नवंबर 2023 में मौत के बाद ग्रुप में फाइनल डिसीजन लेने वाला कोई नहीं बचा।
सहारा अपनी प्रॉपर्टी बेच रहा है ताकि…
- निवेशकों का पैसा लौटाया जाए: सहारा ग्रुप पर निवेशकों के 24,030 करोड़ रुपए बकाया है, जिसे ग्रुप की प्रॉपर्टी बेचकर जुटाए पैसे से चुकाया जाएगा। संपत्ति बेचकर मिले पैसे को सेबी सहारा रिफंड अकाउंट में डाला जा रहा है।
- कोर्ट के आदेशों का पालन: सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को निर्देश दिए हैं कि वो अपनी देनदारियों को चुकाए। प्रॉपर्टी बेचकर जुटाई गई रकम से बकाया चुकाने पर कंपनी पर अवमानना कार्यवाही खत्म हो सकती है।
- फाइनेंशियल प्रेशर कम करना: सहारा ग्रुप की वित्तीय स्थिति ठीक करने और बकाया को चुकाने के लिए संपत्तियों को बेचना जरूरी है। अब तक 16,000 करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं और बाकी रकम के लिए और संपत्तियां बेची जा रही हैं
- बाजार की मुश्किलों का सामना: खराब मार्केट कंडीशन, मुकदमों और जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों की वजह से प्रॉपर्टी बेचना मुश्किल हो रहा था। अडाणी प्रॉपर्टीज के साथ डील से सहारा को अच्छी कीमत और तेजी से लेनदेन का मौका मिला है।
- सुभ्रत रॉय की मौत के बाद फैसले: ग्रुप के मालिक सुभ्रत रॉय की नवंबर 2023 में मौत के बाद ग्रुप में फाइनल डिसीजन लेने वाला कोई नहीं बचा। परिवार ने निवेशकों के हित में संपत्तियों को जल्दी और ज्यादा से ज्यादा कीमत पर बेचने का फैसला किया ताकि ग्रुप के जरूरी काम और लेनदेन पूरा किया जा सके।

कोऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशकों को 5,000 करोड़ लौटाने के आदेश
12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप की ओर से सेबी में जमा 24,030 करोड़ रुपए में से 5,000 करोड़ रुपए सहारा ग्रुप की कोऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। इससे पहले कोर्ट ने 29 मार्च 2023 को भी यहीं आदेश दिया था।
सहारा ने बॉन्ड बेचकर ₹24,000 करोड़ से ज्यादा जुटाए थे
सहारा इंडिया ग्रुप के खिलाफ सबसे बड़ा केस उसकी दो कंपनियों SIRECL और SHICL से जुड़ा है। कंपनी ने SEBI की मंजूरी के बिना ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स यानी OFCDs बेचकर ₹24,000 करोड़ से ज्यादा छोटे निवेशकों से इकट्ठा किए।
आरोप लगा कि ये पब्लिक इश्यू था, लेकिन सहारा ने इसे प्राइवेट प्लेसमेंट बताकर नियम तोड़े। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने आदेश दिया कि बॉन्ड बेचना बंद करें और निवेशकों के पैसे लौटाएं। सहारा ने इसे कोर्ट में चैलेंज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सहारा को 15% ब्याज के साथ पैसे 3 महीने में लौटाने को कहा।
सहारा ऐसा नहीं कर पाया तो उसे तीन किश्तों में पैसे लौटाने को कहा गया। सहारा इंडिया ने 5120 करोड़ रुपए की पहली किश्त जमा कर दी, लेकिन दूसरी और तीसरी किश्त जमा नहीं की। सहारा का कहना था कि वो पहले ही 90% निवेशकों के पैसे लौटा चुका है।
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