जबलपुर में गरीबों के हिस्से का राशन हड़पने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी अफसर और राशन दुकानदार मिलकर गरीबों का निवाला छीनते पाए गए।
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पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के तहत मिलने वाला ₹2.20 करोड़ का गेहूं, चावल और नमक गायब कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अपराध में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी भावना तिवारी और जिला आपूर्ति नियंत्रक नुजहत बानो बकाई सहित खाद्य विभाग के चार अधिकारी शामिल हैं।
स्टॉक एडजस्टमेंट के लिए दायर की थी याचिका यह मामला तब उजागर हुआ जब कुछ राशन दुकानदारों ने स्टॉक एडजस्टमेंट के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद खाद्य विभाग ने नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी), हैदराबाद से पोर्टल की जांच कराई, जिसमें सामने आया कि फर्जी लॉगिन आईडी और संदिग्ध आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर राशन स्टॉक की मात्रा को कम किया गया था। इस तकनीकी जांच से यह साफ हो गया कि यह घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया था।
पीडीएस का ₹2.20 करोड़ का गेहूं, चावल और नमक गायब कर दिया गया था।
2.20 करोड़ का स्टॉक गायब मिला जांच रिपोर्ट में 11 राशन दुकानों से 391.780 मीट्रिक टन गेहूं, 338.789 मीट्रिक टन चावल और अन्य सामग्री मिलाकर कुल ₹2.20 करोड़ का स्टॉक गायब पाया गया। यह स्टॉक जरूरतमंदों तक पहुँचने की बजाय, उसे खुले बाजार में बेच दिया गया और फिर पोर्टल पर स्टॉक कम दिखाकर हेराफेरी की गई।
इस पूरे मामले में 33 लोगों के खिलाफ क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के अलावा मध्यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2015 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत भी आरोप लगाए हैं।

जबलपुर के लॉगिन और पासवर्ड से ही किया एक्सेस कलेक्टर ने बताया कि कमिश्नर फूड के निर्देश पर जब जांच कराई गई, तो यह पता चला कि जबलपुर के लॉगिन और पासवर्ड से ही इस पोर्टल को एक्सेस किया गया था। जांच में 33 लोगों की संलिप्तता मिली है, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें चार सरकारी कर्मचारियों पर भी एफआईआर कराई है।
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