15 परसेंट तक बढ़ने वाली हैं AC की कीमतें, Daikin से लेकर Voltas तक के चढ़ जाएंगे दाम; जानें वजह

Air Conditioner: मार्च के दस्तक देने के साथ ही पारा चढ़ने लगा है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गर्मी इस साल आने वाले महीनों में किस कदर कहर बरपाएगी. इससे राहत के लिए और चंद घंटे सुकून में बिताने के लिए एयर कंडीशनर (Air Conditioner) की दुकानों पर अभी से लाइन लगने लगी है.

इस बीच, Daikin से लेकर Voltas, Blue Star, LG, Haier और Mitsubishi जैसी कंपनियों ने एसी के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया. कंपनियों अपने मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी का यह फैसला कच्चे माल पर बढ़ते खर्च, कमजोर होते रुपये और नए एनर्जी-एफिशिएंसी नॉर्म्स और माल ढुलाई की लागत में आई तेजी के चलते लिया है.

12 परसेंट तक बढ़ेगी Daikin की कीमत 

Daikin इंडिया ने अप्रैल से कीमतों में 12 परसेंट तक की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है. हालांकि, कीमतों यह बढ़ोतरी मॉडल-टू-मॉडल पर निर्भर करेगी. कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कंवलजीत जावा ने PTI को बताया, ”नए एनर्जी नॉर्म्स आए हैं, जिससे प्रोडक्ट्स ज्यादा एफिशिएंट हो गए हैं. साथ ही, कॉपर जैसे मटीरियल्स की कीमतें बढ़ गई हैं, अमेरिकी डॉलर भी (भारतीय रुपये के मुकाबले) अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर है. ग्लोबल लेवल पर भी भारी उथल-पुथल के बीच बहुत सारी अनिश्चितताएं हैं और फ्रेट कॉस्ट भी बढ़ गई है, जिससे (कंपोनेंट्स का) इंपोर्ट महंगा हो गया है इसलिए कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है.”

क्यों बढ़ने वाली हैं एसी की कीमतें? 

  • कॉपर से लेकर एल्युमीनियम और स्टील की कीमतें ग्लोबल लेवल पर काफी बढ़ गई हैं. इससे प्रोडक्शन कॉस्ट भी बढ़ा है, जिसका कीमत पर असर दिखने लगा है.
  • सरकार द्वारा लागू किए गए नए एनर्जी लेबलिंग नियमों और दक्षता मानदंडों को अपनाने की वजह से भी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ा है. दरअसल, सरकार की तरफ से ISEER (Indian Seasonal Energy Efficiency Ratio) के मानक बढ़ा दिए गए हैं. इसका मतलब यह है कि अब कंपनियों को कम बिजली में अधिक ठंडक देनी होगी. इसके लिए कंपनियों को पूरानी तकनीक और पुराना कम्प्रेसर बदलकर नई और एडवांस तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है. ऐसे में खर्च भी बढ़ रहा है.
  • भारतीय करेंसी के मुकाबले डॉलर की बढ़ती वैल्यू से भारतीय कंपनियों के लिए आयात महंगा होता जा रहा है. अब आयात महंगा होगा, तो बनने वाला उत्पाद भी अपने आप महंगा हो जाएगा.
  • ग्लोबल लेवल पर जंग के माहौल के बीच सप्लाई चेन में रुकावट आई है और लॉजिटिक्स पर खर्च बढ़ गया है. ऐसे में कंपनियां अतिरिक्त बोझ उठाने के लिए कीमतें बढ़ा रही हैं.

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