घास और बांस के मिक्स से तैयार करती हैं मौसम के अनुकूल टोपी, ठंढ और लू से करता है सुरक्षा

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Chhatarpur news: डिंडोरी की रहने वाली शुभा भार्वे जो बचपन से घास की पत्तियों से तमाम तरह के प्रोडक्ट बनाती हैं. लेकिन इनके हांथ से बनाई टोपी की डिमांड बहुत ज्यादा रहती है. ये टोपी घास से ही बनाती हैं. इसकी खासियत है कि ठंड में यह गर्मी का एहसास देती है और गर्मी में ठंड का एहसास देती है.

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Ghas Ki Topi: डिंडोरी की रहने वाली शुभा भार्वे घास और बांस के मिक्स से कई तरह के प्रोडक्ट बनाती है. फ्लावर स्टिक, फ्लावर स्टैंड, पेन स्टैंड, मालाएं और टोकरी जैसे तमाम तरह के प्रोडक्ट बनाती हैं लेकिन इनकी घास से बनी टोपी कुछ खास होती है. इसलिए इस टोपी की डिमांड भी ज्यादा रहती है. शुभा बताती हैं कि वह बचपन से ही बांस और घास से तमाम तरह के सामान बना रही हैं.‌ ये सामान बनाना उनकी पीढ़ियों से चला आ रहा है. ये उनकी परंपरा का हिस्सा भी होता है.

मौसम के अनुकूल है घास की टोपी 

तमाम तरह के प्रोडक्ट के साथ में शुभा घास की एक खास टोपी भी बनती है. जो मौसम की अनुकूल होती है अगर आप इसे ठंड में पहनते हैं तो आपको ठंड नहीं लगती है और गर्मी में पहनते हैं तो आपको गर्मी का एहसास नहीं होता है. शुभा बताती हैं कि इस टोपी को तैयार करने में पूरा एक दिन लग जाता है. यह टोपी पहनने पर सिर पर चुभती नहीं है. अगर गर्मियों में लू चलती है तो कर सर ठंडा रहता है. इस टोपी की रेट की बात करें तो शुरुआती कीमत 300 रुपए है. साइज़ के अनुसार टोपी का रेट बढ़ता है.

टोपी के अलावा तैयार करती हैं फ्लावर स्टैंड

शुभा घास की टोपी के साथ ही कई प्रकार फ्लावर स्टैंड भी बनाती हैं. फ्लावर स्टैंड की रेट की बात करें तो यह 100 में बेचते हैं. यह फ्लावर स्टैंड बांस से बना होता है. घास की लकड़ी से पेन स्टैंड भी बनाती हैं जिसका रेट 100 रुपए होता है. शुभा बताती हैं कि वह तमाम तरह के प्रोडक्ट तैयार करती हैं. उसी के अनुसार प्राइस भी खुद ही तय करती हैं. शुभा जितने प्रोडक्ट बना लेती हैं उसी हिसाब से उनको कमाई भी हो जाती है. हमने प्रोडक्ट पर कितना मटेरियल लगाया और हमारा समय कितना लगा है इसके बाद उस प्रोडक्ट का रेट तय करते हैं.

लागत का इतना मुनाफा मिलता है

शुभा बताती हैं कि 100 रुपए का मटेरियल लगाया है तो उसमें 50 रुपए का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. यानी 100 रुपए लागत है. उस प्रोडक्ट को डेढ़ सौ रुपए में बेचेंगे.शुभा बताती हैं कि हमारी कमाई हमारी मेहनत के ऊपर है, जितने हम प्रोडक्ट बना लेंगे उतना ही पैसा कमा लेंगे. ये सभी तरह का प्रोडक्ट लोग खरीदना पसंद करते हैं. अगर नहीं खरीदते होते तो अभी तक तो हम यह काम ही बंद कर देते. शुभा बताती हैं कि उन्हें मप्र सरकार की तरफ से बड़े शहरों में बुलाया जाता है. सरकार भी हमारी मदद करती है. हाल ही में खजुराहो के आदिवर्त स्थापना के तीसरे समारोह में इन्होंने अपनी प्रदर्शनी भी लगाई थी.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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घास और बांस के मिक्स से तैयार करती हैं मौसम के अनुकूल टोपी

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