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Kunwari River Story: मध्य प्रदेश की कुंवारी या क्वारी नदी की कहानी बेहद रोचक है. कहते हैं कि एक कुंवारी कन्या की जल समाधि की वजह से कुंवारी नदी का उद्गम हुआ. आज भी शिवपुरी के उस गांव में वो जगह है. वहीं पर मंदिर भी बना है, जो आस्था का प्रमुख केंद्र भी है. जानें कथा…
Shivpuri News: मध्य प्रदेश की कुंवारी नदी का उद्गम स्थल कहां है? इस सवाल के जवाब में एक रोचक मान्यता है, जिसकी कहानी आज भी सुनने वालों को हैरान करती है. इस नदी की शुरुआत शिवपुरी जिले से होती है. यहां बैराड़ के पास देवगढ़ क्षेत्र के दरगवां गांव में एक पुरानी बावड़ी है. गांव के लोग मानते हैं कि यहीं से कुंवारी नदी की शुरुआत हुई थी. आज भी आसपास के लोग इस जगह को श्रद्धा से देखते हैं. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक बावड़ी नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है. बुजुर्ग बताते हैं कि यहां एक चमत्कारी घटना हुई थी, जिसके बाद जलधारा फूटी और नदी बहने लगी.
तपस्विनी कन्या की अनोखी कथा
दरगवां गांव में प्रचलित कहानी के मुताबिक, गांव में एक तेली परिवार रहता था. परिवार में एक बेटी थी. उसकी सौतेली मां उससे अच्छा व्यवहार नहीं करती थी. रोज उसे पानी भरने भेजती थी. हैरानी की बात तो ये कि वह लड़की बिना रस्सी के बावड़ी से पानी भर लाती थी. दरअसल, वह बावड़ी की परिक्रमा करती थी. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर बावड़ी का पानी खुद ऊपर आ जाता था. वह घड़ा भरकर घर ले जाती और नंदी को भी पानी पिलाती थी. गांव के लोग आज भी उसकी भक्ति और पवित्रता की मिसाल देते हैं.
पिता की आंखों से घटी घटना
एक दिन सौतेली मां को शक हुआ और उसने पति से कहा कि जाकर देखो, लड़की आखिर पानी कैसे भरती है? पिता चुपचाप बावड़ी के पास पेड़ पर छिपकर बैठ गए. उन्होंने देखा कि बेटी आई और जैसे ही उसने परिक्रमा लगाई पानी ऊपर आ गया. यह देखकर वह हैरान रह गए और भावुक भी हो गए. उनकी आंखों से एक आंसू टपक पड़ा, जो लड़की पर गिरा. लड़की ने ऊपर की ओर देखा तो पिता दिख गए. कथा के अनुसार, लड़की को लगा कि उसकी तपस्या भंग हो गई. तभी उसने खुद को बावड़ी को समर्पित कर दिया और वहीं समा गई. तभी जलधारा फूटी और वह नदी रूप में बह रही है.
कुंवारी कन्या का बना मंदिर
शिवपुरी जिले के दरगवां गांव में उसी बावड़ी के पास कुंवारी कन्या का एक छोटा सा मंदिर बना है. मंदिर में कुंवारी कन्या और नदी की तस्वीर स्थापित की गई है, जहां ग्रामीण श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर की दीवार पर संक्षेप में कथा भी लिखी है कि ग्राम दरगवां की एक कुंवारी कन्या ने इसी कुएं में जलसमाधि ली थी. लोकविश्वास है कि उसी जलसमाधि के बाद इसी कुएं से कुंवारी नदी का उद्गम हुआ. आज भी लोग यहां मन्नतें मांगने पहुंचते हैं.
कहां से कहां तक बहती है क्वारी नदी?
कुंवारी नदी, जिसे क्वारी भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बहने वाली एक महत्वपूर्ण नदी है. इसका प्रवाह मुख्य रूप से श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों से होकर गुजरता है. यह नदी कई गांवों और कस्बों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है. बरसात के मौसम में इसका जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे आसपास के खेतों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है. आगे बढ़ते हुए यह नदी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सिंध नदी में जाकर मिलती है. सिंध नदी आगे चलकर यमुना नदी की सहायक नदी के रूप में जुड़ती है. इस तरह कुंवारी नदी अप्रत्यक्ष रूप से यमुना नदी तंत्र का हिस्सा बन जाती है.
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