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Shivpuri News: ग्रामीण इन शंखों को अपने घरों में रखते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. दक्षिणावर्ती शंख होने के चलते भगवान को इन्हीं शंख से जल अर्पित किया जाता है, जिससे वे जल्दी प्रसन्न होते हैं.
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक ऐसा गांव है, जहां पत्थरों और खेतों में शंख पाए जाते हैं. बताया जाता है कि पठार और गांव के खेतों में खेती करने वाले किसानों को कई बार ये शंख नजर आ जाते हैं. कई लोग इन शंखों को पत्थरों से निकालकर अपने घर भी ले जाते हैं. दक्षिणावर्ती शंख की धार्मिक मान्यता काफी अधिक मानी जाती है. यह शंख देश की गिनी-चुनी जगहों पर ही मिलते हैं. लोगों का मानना है कि इस गांव में पत्थरों के भीतर भी ये शंख पाए जाते हैं, जिन्हें कारीगर अपनी कारीगरी से आसानी से निकाल लेते हैं. लोग इस गांव को धार्मिक दृष्टि से भी देखते हैं.
गांव के लोग इन शंखों को अपने घरों में रखकर भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख होने के कारण भगवान को इन्हीं शंखों से जल अर्पित किया जाता है, जिससे भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं. लोगों ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में ये शंख मिलते हैं और दूर-दूर से लोग इन्हें लेने के लिए गांव पहुंचते हैं. भारत में ऐसी बहुत ही कम जगहें हैं, जहां दक्षिणावर्ती शंख पाए जाते हैं.
प्राकृतिक शंखों के लिए मशहूर गांव
जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित राई नाम से मशहूर राई गांव अपने पहाड़ों, चट्टानों और खेतों में मिलने वाले अनोखे प्राकृतिक शंखों के लिए जाना जाता है. ये शंख देखने में दक्षिणावर्ती शंख जैसे प्रतीत होते हैं. यह इलाका भू-गर्भीय रूप से अत्यंत प्राचीन माना जाता है. यहां प्राचीन राई के पहाड़ और कई छोटे-बड़े पत्थर मौजूद हैं. राई गांव के आसपास की चट्टानों और खेतों में ऐसे जीवाश्म या पत्थर पाए जाते हैं, जिनकी बनावट दक्षिणावर्ती शंख की तरह होती है.
पहले आसानी से मिल जाते थे शंख
ग्रामीण निरपत सिंह गुर्जर लोकल 18 को बताते हैं कि गांव पहाड़ियों के पास बसा हुआ है, जिस कारण यहां लंबे समय से शंख मिलते आ रहे हैं. यहां के शंखों की अलग ही मान्यता है. इन शंखों से भगवान को जल अर्पित किया जाता है. ये शंख दक्षिणावर्ती शंख जैसे आकार के होते हैं. पहले ये शंख बहुत आसानी से मिल जाते थे लेकिन अब इन्हें खोजने में काफी मेहनत करनी पड़ती है. पहाड़ियों में कारीगर इन्हें बड़ी मुश्किल से निकालते हैं. पहले हर खेत में ये शंख मिल जाते थे लेकिन अब बहुत कम देखने को मिलते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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