खरगोन में दिखा दुर्लभ नजारा! पानी नहीं…मिट्टी में नहाती दिखी गौरैया

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Khargone News: गौरैया की डस्ट बाथ उसकी प्राकृतिक सफाई से जुड़ी प्रक्रिया का एक हिस्सा है. इससे उसके शरीर से छोटे-छोटे परजीवी और कीट खत्म हो जाते हैं. मिट्टी की हल्की गर्मी उसे ठंड में शरीर का जरूरी तापमान बनाए रखने में मदद करती है.

खरगोन. आमतौर पर पक्षियों को पानी में नहाते हुए तो आपने खूब देखा होगा लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन में विलुप्त होती चिड़िया की गौरैया प्रजाति को मिट्टी में नहाते हुए शायद ही देखा होगा. पानी की जगह मिट्टी में नहाने वाली यह छोटी चिड़िया अपने अनोखे अंदाज से हर किसी को हैरत में डाल रही है. शाम के घरों के आंगन या खुले मैदानों की सूखी मिट्टी में गौरैया अपने पंख फैलाकर गोल-गोल घूमती हैं और धूल में नहाती हैं. यह नजारा इतना मनोरम होता है कि देखने वाला पलभर के लिए ठहर जाता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, गौरैया का यह ‘डस्ट बाथ’ यानी मिट्टी स्नान उसकी प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया का हिस्सा है. इससे चिड़िया के शरीर से छोटे-छोटे परजीवी और कीड़े खत्म हो जाते हैं. साथ ही मिट्टी की हल्की गर्मी उसे ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करती है. लोग बताते हैं कि पहले यह नजारा अक्सर दिख जाता था लेकिन अब गौरैया की संख्या कम होने से यह दृश्य बहुत दुर्लभ हो गया है.

क्यों विलुप्त हो रही गौरैया?
प्राणी शास्त्र के प्रोफेसर डॉ प्रवीण पांडे लोकल 18 को बताते हैं कि गौरैया के लिए प्राकृतिक वातावरण का कम होना और पेड़ काटकर वहां आधुनिक कंक्रीट करने से उनकी आबादी तेजी से घट रही है. अब गांवों के कुछ हिस्सों में ही यह दृश्य देखने को मिलता है, जहां खुली मिट्टी और पेड़ मौजूद हैं. पहले गांवों के खुले आंगनों, खेतों के किनारों या पुराने घरों की दीवारों के पास यह चिड़िया अक्सर मिट्टी में खेलती नजर आती है.

बचाने में जुटे हैं पक्षी प्रेमी
विशेषज्ञों का मानना है कि गौरैया न केवल हमारे घरों की साथी रही है बल्कि पर्यावरण के संतुलन की अहम कड़ी भी है. हालांकि कई पर्यावरण प्रेमी अब गौरैया को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं. कई जगह गौरैया के लिए कृत्रिम घर लगाने और खुले स्थानों पर दाने-पानी रखने की पहल की जा रही है. उनका मानना है कि गौरैया सिर्फ एक पक्षी नहीं बल्कि हमारे बचपन और प्राकृतिक धरोहर का हिस्सा है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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