देश की सुरक्षा में आया नया हथियार..पाताल से आतंकियों को खोज निकालेगा ये ड्रोन

नई दिल्ली : भारत देश की ओर आंख उठाकर देखने वाले आतंकवादियों की अब खैर नहीं होगी. इंडियन आर्मी की मदद से दिल्ली के लड़कों ने मिलकर एक ऐसा डिफेंस ड्रोन सिस्टम बनाया है.  जो आतंकवादियों को पाताल से भी खोज निकालेगा, जिससे इंडियन आर्मी को सर्च ऑपरेशन करने में काफी मदद मिलेगी. यही नहीं, यह ड्रोन डिफेंस सिस्टम भारत में बिगड़ते जा रहे प्रदूषण पर भी प्रहार करेगा. जब घना कोहरा होगा. उस वक्त भी ड्राइवर की जान बचाने में यह ड्रोन सिस्टम काफी सहायक साबित होगा.

‘हेलियस एआई’ नाम की बनाई है कंपनी

यह जानकारी प्रखर त्रिपाठी और तुषार कोटवाल ने दी है, जिन्होंने मिलकर एक कंपनी शुरू की है, जिसका नाम ‘हेलियस एआई’ है. इस कंपनी में इन्होंने बनाया है. ड्रोन डिफेंस सिस्टम जिसे इंडियन आर्मी की मदद से ही तैयार किया गया है. इस डिफेंस सिस्टम के लिए दिल्ली सरकार ने इन्हें 10 लाख रुपए देकर सम्मानित भी किया है. आइये जानते हैं इस ड्रोन डिफेंस सिस्टम के बारे में.

इस तरह करेगा ड्रोन सिस्टम काम

तुषार कोटवाल ने बताया कि जम्मू कश्मीर में ज्यादातर आतंकवादी घटनाएं होती है. वहां पर जंगली एरिया है. पहाड़ी इलाके हैं, जहां पर आतंकवादी आराम से नाले के जरिए प्रवेश कर जाते हैं. इसके साथ ही भारत देश की सीमा में और उसके बाद वो कहीं पर भी छुप सकते हैं. उन्हें ढूंढ निकालना मुश्किल हो जाता है. पहलगाम में जो घटना हुई. उसमें भी घने जंगल में आतंकवादी कहां घुस गए. यह पता लगाना मुश्किल हो गया था.

ऐसे में इन घटनाओं को रोकने के लिए और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए ही इस डिफेंस ड्रोन सिस्टम को बनाया गया है. जो आसानी से ऐसे घने जंगल और नालों के अंदर भी छिपे हुए आतंकवादियों का पता खोज निकालेगा और इंडियन आर्मी को इसकी सूचना दे देगा, जिससे इंडियन आर्मी को कार्रवाई करने में मदद मिलेगी.

एयर क्वालिटी इंडेक्स पर इस तरह करेगा काम

कंपनी के फाउंडर प्रखर त्रिपाठी ने बताया कि यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैमरा है, जो कि दिल्ली में जितने भी मौजूद हॉटस्पॉट हैं. एयर क्वालिटी इंडेक्स के जहां पर हवा ज्यादा खराब है. यह उनको चिन्हित कर लेगा और सरकार तक और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तक इसकी जानकारी दे देगा. ताकि इन हॉटस्पॉट पर हम काम कर सकें और एयर क्वालिटी इंडेक्स को कम कर सकें.

इसके अलावा जब घना कोहरा होगा तो गाड़ी के बोनट पर भी इसको अगर लगाया जाए तो 200 मीटर तक ड्राइवर को जानकारी देता रहेगा कि सामने कोई ऑब्जेक्ट है या नहीं. उन्होंने बताया कि उनके पिता इंडियन आर्मी से ही रिटायर्ड हैं और जब वह इंडियन आर्मी में थे. तब उनके घर से थोड़ी दूर पर जम्मू कश्मीर में बहुत बड़ी घटना हुई थी. तब उनको इस ड्रोन सिस्टम को बनाने का आइडिया आया था. इन्होंने उस वक्त एक रिसर्च पेपर लिखा था, जिसे इंडियन आर्मी को बहुत पसंद आया था और उसके बाद ही इंडियन आर्मी की मदद से इसे तैयार किया है.

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