दमोह वन मंडल के सागोनी रेंज में मंगलवार शाम गिद्धों का एक झुंड दिखाई दिया। नोहटा के पास 27 मिल के एक मैदान में बड़ी संख्या में गिद्ध बैठे हुए थे, जिसे देखकर स्थानीय लोगों ने उनका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर किया। गिद्धों की प्रजाति धीरे-धीरे खत्म हो रही है, लेकिन दमोह जिले से अच्छी खबर आ रही है। डीएफओ ईश्वर जरांडे के मुताबिक, जिले में गिद्धों की तादाद लगातार बढ़ रही है। नोहटा के अलावा तेजगढ़, तारादेही और तेंदूखेड़ा के जंगलों में भी गिद्धों के कई झुंड और उनके घोंसले मिले हैं। पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं गिद्ध? गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। ये मरे हुए जानवरों को खाकर गंदगी साफ करते हैं, जिससे बीमारियां और प्रदूषण नहीं फैलता। पर्यावरण को सुरक्षित रखने में इनका बहुत बड़ा हाथ होता है। वन विभाग की निगरानी वन विभाग इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए खास इंतजाम कर रहा है। गिद्धों की गणना के दौरान भी अधिकारियों को इन इलाकों में उनकी सक्रियता के पुख्ता सबूत मिले थे। नोहटा में गिद्धों का दिखना इस बात का संकेत है कि यहां का वातावरण उनके रहने के लिए अनुकूल है। .