लाल चकत्तों वाली ऐसी बीमारी… जो चमड़ी कर सकती है तहस-नहस, ठंड में जोखिम अधिक, जानिए इसके लक्षण और बचाव

Psoriasis Symptoms And Treatment: सर्दी में सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में सोरायसिस भी एक है. यह त्वचा में होने वाला एक तरह का इंफेक्शन है. इसकी शुरुआत लाल पपड़ीदार चकत्तों से होती है. इन चकत्तों से उठने वाली खुजली आपको परेशान करने के लिए काफी है. यह किसी उम्र के महिला-पुरुष को हो सकती है. इससे निजात पाने के लिए लोग महंगी दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. लेकिन, कुछ घरेलू उपाय इस बीमारी में अधिक कारगर हो सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर लाल पपड़ीदार चकत्तों वाली सोरायसिस बीमारी क्या है? सोरायसिस के लक्षण क्या हैं? सोरायसिस से कैसे करें बचाव? आइए जानते हैं इस बारे में-

लाल चकत्तों वाली सोरायसिस क्या है?

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, सोरायसिस त्वचा से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है. बता दें कि, शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली ही स्वस्थ्य कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करती है. यह बीमारी सामान्यत: मोटी स्किन पर देखी जाती है. इसमें स्किन पर जगह-जगह परत बनने लगती है. त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते दिखने लगते हैं, फिर धीरे धीरे इन पर सफेद रंग की पपड़ी बनने लगती है. इन दानों में तेज खुजली होती है. यह दिक्कत घुटने, कोहनी, स्कैल्प, हाथों के पंजों पर और पीठ के निचले हिस्से में सबसे अधिक होती है.

किन लक्षणों से करें सोरायसिस की पहचान?

प्लाक सोरायसिस देखने में दाद जैसा लगता है. लेकिन, इसके परिणाम गंभीर होते हैं. यह बीमारी होने पर सफेद, चांदी जैसी या बदरंग लाल, भूरी स्किन दिखती है. इसके अलावा, दानों के बीच दरारे आना, उनसे हल्का खून आना, खुजली होना या फिर दर्द के साथ जलन होना भी इस बीमारी के लक्षण हैं.

सोरायसिस की खुजली कंट्रोल करने के तरीके?

– सोरायसिस की समस्या कंट्रोल करने के लिए नीम के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-एलर्जिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसके इस्तेमाल से सूजन और जलन से राहत मिलती है.

– लाल चकत्तों से उठने वाली खुजली कंट्रोल करने के लिए एलोवेरा जेल एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. दरअसल, इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं. इससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है.

– सोरायसिस के शिकार होने पर उसमें खुजली होना आम बात है. इस जलन और इंफेक्शन को रोकने के लिए तोरई के पत्ते कारगर हो सकते हैं. इसके लिए इन पत्तों को घिसकर इसमें एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाकर प्रभावित जगह पर लगाएं.

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